गरीब गुरबों की आवाज व लालूवादी विचारधारा के सरताज थे रघुवंश बाबू

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@गोपेंद्र कु सिन्हा गौतम

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के निकट सहयोगी, राष्ट्रीय जनता दल के उपाध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री डा रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन से लालूवादी विचारधारा को गहरा झटका लगा है। जिस गरीब गुरबा केंद्रित सामाजिक राष्ट्रवादी विचारधारा को लालू प्रसाद यादव ने भारतीय राजनीति में स्थापित किया, उसके पोषण में रघुवंश प्रसाद सिंह का बहुत बड़ा योगदान रहा है। लालू प्रसाद यादव के साथ कई दशकों से लगातार काम कर रहे थे ।

 

कदम कदम पर उन्होंने लालू प्रसाद यादव और राष्ट्रीय जनता दल को अपना सौ प्रतिशत योगदान देते रहे। लालू प्रसाद यादव ने भी उन पर पूर्ण विश्वास रखा।जीवन की अंतिम घड़ी में जब वे एम्स हॉस्पिटल नई दिल्ली में वेंटीलेटर पर जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे तो, उसी एम्स अस्पताल से तथाकथित एक पत्र रघुवंश बाबू के हस्त लेख में जारी किया गया, जिसके प्रतिउत्तर में लालू प्रसाद यादव जी ने कहा आप कहीं नहीं जा रहे हैं, लेकिन विधि का विधान भला कौन रोक सकता है। पार्टी और विचारधारा से अलग होने से तो, लालू प्रसाद यादव ने उन्हें रोक लिया पर इस धारा को अलविदा कहने से नहीं रोक पाए। तथाकथित पत्र जो रघुवंश बाबू की हस्त लेख में था, उसमें कहीं यह जिक्र नहीं था कि मैं पार्टी को छोड़ रहा हूं या इस्तीफा दे रहा हूं ।

 

उसमें बस यही कहा गया था आपके साथ मैं लंबे वक्त तक रहा अब और नहीं पार्टी के पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं का सहयोग देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इसका आशय यह भी हो सकता है कि उन्हें अपने मौत का पूर्वाभ्यास हो गया हो, जिसे समझते हुए वे अपने परम मित्र सहयोगी लालू प्रसाद यादव को अवगत कराना चाह रहे हो कि मैं अब और आपके साथ न रह सकता हूं, क्योंकि अब मैं अनंत यात्रा के पथ पर चल पड़ा हूं। परंतु जो भी हो रघुवंश प्रसाद सिंह और लालू प्रसाद यादव एक दूसरे के प्रतिरूप रहे।

 

 

स्वर्गीय रघुवंश प्रसाद सिंह प्रखर सामाजवादी प्रभावशाली व्यक्तित्व कृतित्व के धनी बेमिसाल आदर्श ओजस्वी वक्ता कुशल प्रशासक बिहार के पूर्व मंत्री बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति पूर्व केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री मनरेगा के जनक, जन जन के नेता  महात्मा गांधी लोहिया जयप्रकाश अम्बेडकर कर्पूरी ठाकुर के दर्शन के बुलंद आवाज विद्वान शिक्षाविद गणित के प्राध्यापक रहें।

 

 

रघुवंश बाबू का राजनीतिक सफर भी काफी लंबा रहा। पांच बार बिहार विधानसभा के सदस्य रहे । पांच बार सांसद रहे। सम्पूर्ण जीवन जनसेवा समाज सुधार राष्ट्र के लिए सर्वस्व समर्पित कर दिया । रघुवंश प्रसाद सिंह एक ऐसे राजनेता थे, जिन्हें पार्टी और विचारधारा से इतर लोग भी बहुत गंभीरता से लेते थे।उनकी बातों का मूल्य राष्ट्रीय जनता दल के मुखर विरोधी भी समझते थे।

 

 

रघुवंश प्रसाद सिंह का निधन राष्ट्रीय जनता दल के साथ-साथ सामाजिक-राजनीतिक जीवन की अपूरणीय क्षति है।सभी दलों में समान रूप से लोकप्रिय रघुवंश बाबु यों तो 1977 में ही विधायक चुने गए थे और उसी वर्ष उन्हें मंत्री बनने का मौका भी मिला था।1980और 85 का विधानसभा चुनाव भी वे बेलसंड से जीते ।1990  में दुर्भाग्यवश वे कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय प्रताप सिंह से हार गए थे । उस हार के बाद लालू प्रसाद यादव ने रघुवंश बाबु को एक दिन भी घर नहीं बैठने दिया और तुरंत हुए विधान परिषद चुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाया । फिर विधान परिषद के कार्यकारी सभापति, सभापति,फिर 1995 में बेलसंड से विधायक, बिहार सरकार में मंत्री, 1996 में वैशाली से  चार बार सांसद, और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में चलने वाली प्रथम यूपीए सरकार में राष्ट्रीय जनता दल कोटे से ग्रामीण विकास विभाग में केंद्रीय मंत्री बने।

 

लालू जी के एहसान को रघुवंश बाबु ने भी उतारने में कोई कोताही नहीं बरती।मनसा-वाचा-कर्मणा वे लालू प्रसाद यादव और राजद के साथ बने रहे । लालू प्रसाद यादव के कितने विश्वस्त सहयोगी थे इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि जब कुछ दिनों पहले लालू प्रसाद यादव से जेल में उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई तो उसके अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए नारा लगाते रघुवंश बाबु की वह तस्वीर को देशवासी कभी नहीं भूल सकते जिसमें उन्होंने कहा था- जेल का फाटक टुटेगा, लालू यादव छुटेगा।विद्वान प्रोफेसर रघुवंश सिंह ने अपने को ठेठ भदेस समाजवादी अंदाज में ढाल लिया था।लोग उन पर लालू प्रसाद यादव के दूसरा रूप मानते थे ।

 

 

कई प्रमुख पदों की जिम्मेवारी संभालने के बावजूद भी उनकी ईमानदारी पर विरोधियों को भी कभी संदेह नहीं था ।वे किसी राजनीतिक दल और व्यक्ति के लिए अमूल्य निधि के समान थे ।वे कुशल राजनेता थे जो जनता की नब्ज को पहचानते थे।उनके दिमाग की उपज मनरेगा योजना ने करोड़ों देशवासियों को रोजगार देने का काम किया।मंदी के दौर में जब चौतरफा रोजगार खत्म हो रहा है बेरोजगारी से देश के नौजवान परेशान होकर आए दिन आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं उस दौर में मनरेगा योजना गरीब मजदूरों को रोजगार मुहैया कराकर उन्हें जीने लायक जिंदगी प्रदान कर रहा है।जिस मनरेगा योजना को वर्तमान सरकार जो विपक्ष में रहते हुए बेकार की योजना मानता था आज वही रघुवंश बाबू द्वारा शुल्क की गई योजना इस सरकार के लिए सर छुपाने की जगह दे रहा है।उन्हें कानाफुसी की राजनीति तनिक भी रास नहीं आता था उसके जगह पर संघर्ष का रास्ता अख्तयार करते थे ।

 

 

राजनीति का दुर्भाग्य है कि रघुवंश सिंह  की जगह पर जनता भी वैसे लोगों को चुनती है जो उनके संधारण समर्थकों के बराबर भी नहीं हैं। राष्ट्रीय जनता दल और लालू प्रसाद यादव,तेजस्वी यादव को रघुवंश प्रसाद के निधन से दुखित उनके परिवार और शुभचिंतकों के साथ रहते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यह घोषणा कर देनी चाहिए की रघुवंश बाबू जिस विधानसभा सीट बेलसंड से चुनाव लड़ते थे इस विधानसभा चुनाव में उस सीट पर उनके चहेते उम्मीदवार को चुनाव लड़ने की जिम्मेवारी दी जाएगी और अगर उनके परिवार से या कोई निकट सहयोगी वहां से किसी भी राजनीतिक दल से चुनाव लड़ना चाहे तो उसके विपक्ष में राष्ट्रीय जनता दल कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं करेगा।यह रघुवंश बाबू के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।साथ ही राष्ट्रीय जनता दल के राजनीतिक भविष्य के लिए भी ब्रह्म बाबा का अंतिम ब्रह्मास्त्र साबित होगा। लालू प्रसाद यादव रघुवंश बाबू को प्यार से ब्रह्म बाबा का कर पुकारते थे।श्रद्धेय रघुवंश बाबू को अंतिम श्रद्धांजलि।

(सामाजिक और राजनीतिक चिंतक)

औरंगाबाद बिहार

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