दिल तेज-तेज धड़कना मेडिकल साइंस में ये एक खतरनाक बीमारी हैं

@संजीवनी रिपोर्टर

पटना: दिल तेज-तेज धड़कना शायरों के लिए तो अच्छे शब्द हो सकते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस में ये एक बीमारी है। इसी तरह दिल का धीरे धड़कना भी बीमारी है। इसे एरिथमिया कहते हैं। ये दोनों हालात कई बार जानलेवा भी हो सकते हैं। कोरोना भी एरिथमिया की वजह बन सकता है। यही बात आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इस सप्ताह वर्ल्ड हार्ट रिदम वीक मनाया जा रहा है।

पटना आईजीआइसी के कार्डियोलॉजी डॉ. हिमांशु कुमार ने कोरोना और अनियमित हार्ट बीट से जुड़े कई पहलुओं पर बात की।डॉ हिमांशु का कहना है कि कोरोना के इस दौर में दिल की देखभाल करना बहुत जरूरी है क्योंकि यह शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। हार्ट ही ऐसा अंग है जो शरीर के सभी अंगों में ब्लड पंप करके उन्हें जिंदा रखता है।

पिछले कुछ दशकों में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अनहेल्दी डाइट, मोटापा, लेजी लाइफस्टाइल, शराब और तंबाकू की आदतों के कारण दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव लाकर दिल पर बढ़ते बोझ को कम किया जाए।

हार्ट बीट बढ़ने पर कुछ बीट स्किप हो सकती हैं
हार्ट पैल्पिटेशन हार्ट बीट को बढ़ा देती है और कभी-कभी कुछ बीट स्किप हो जाती हैं, लेकिन अक्सर इस पर लोगों का ध्यान नहीं जाता है। यह ज्यादातर स्ट्रेस, एंग्जायटी, ओवर- एक्सरसाइज, कैफीन या शराब बहुत ज्यादा लेने की वजह से होता है। लेकिन ये गड़बड़ी हार्ट इलेक्ट्रिकल सिस्टम में बदलाव के कारण हुई एबनॉर्मल हार्ट बीट की वजह से भी हो सकती है। इसी वजह से दिल की तेज या धीमी गति होती है या फिर कुछ बीट स्किप हो जाती हैं।

असामान्य हुई हार्टबीट को एरिथमिया कहते हैं
हार्ट इलेक्ट्रिकल सिस्टम में इस तरह के बदलाव की वजह से असामान्य हुई हार्टबीट या रिदम को ही एरिथमिया कहते हैं। हर किसी पर एरिथमिया का प्रभाव भी अलग-अलग होता है, कुछ लोगों की हेल्थ पर इसका ज्यादा असर नहीं होता, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह जान का खतरा बन सकता है।

एरिथमिया मुख्य रूप से दो तरह का हो सकता है

टैकीकार्डिया: जब दिल बहुत तेज धड़कता है यानी हर मिनट 100 बीट से ज्यादा हो तो टैकीकार्डिया हो सकता है। कुछ लोगों में टैकीकार्डिया आसान इलाज से ठीक हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में यह घातक हो सकता है। यह नॉर्मल फिजिकल एक्टिविटी से भी ट्रिगर हो सकता है, जो मेडिकल प्रॉब्लम्स की ओर इशारा करता है।

ब्रैडीकार्डिया: जब दिल बहुत धीरे धड़कता है यानी हर मिनट 60 बीट से कम हो तो ब्रैडीकार्डिया हो सकता है। यह स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर होती है क्योंकि इसमें हार्ट ऑक्सीजन वाला पर्याप्त ब्लड पूरी बॉडी के लिए पंप नहीं कर पाता है।

हालांकि दिक्कत ज्यादा न होने पर लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव जैसे- स्ट्रेस या एंग्जायटी कम करने के लिए मेडिटेशन और योग करना, शराब, निकोटिन या कैफीन वाली चीजों से दूरी, सर्दी या खांसी की दवाई बिना डॉक्टरी सलाह के न लेना, स्टेरॉयड या न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट से दूरी बनाकर इससे बचा जा सकता है।

एरिथमिया कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है
आमतौर पर सांस लेने में कठिनाई, थकान और सांस फूलना एरिथमिया के कारण हो सकता है, लेकिन अधिक गंभीर मामलों में इसकी वजह से अचानक कार्डियक अरेस्ट के कारण दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु भी हो सकती है।

हार्ट अटैक में दर्द होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में थम जाता है दिल
डॉ हिमांशु कहते हैं कि ज्यादातर लोग अचानक कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में फर्क नहीं कर पाते हैं। हार्ट अटैक तब होता है जब दिल में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली रक्त वाहिकाएं ब्लॉक हो जाती हैं जिसके कारण सीने में दर्द होता है। जबकि अचानक कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब अनियमित दिल की धड़कन दिल को पूरी तरह से रोक देती है, जिससे अचानक मौत हो जाती है। जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक आ चुका है और कमजोर हार्ट पंपिंग फंक्शन के कारण हार्ट फेलियर से जुड़े लक्षण हैं, उन्हें एरिथमिया का खतरा ज्यादा है।

एरिथमिया को ट्रिगर कर सकता है कोरोना
डॉ हिमांशु कहते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान दिल से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की समस्या और ज्यादा बढ़ गई। कोरोना के कारण दिल की बीमारियों, फेफड़ों की समस्या और कैंसर से जूझ रहे लोगों की जान चली गई। सामान्य तौर पर दिल का कोई भी वायरल संक्रमण

कार्डियक एरिथमिया को ट्रिगर कर सकता है, इसलिए कोरोना कोई अपवाद नहीं है।

हालांकि कुछ मामलों में यह देखा गया है कि दिल के ऊपरी चैंबर में हार्ट बीट अनियमित हो जाती है और कोरोना से मरीज की रिकवरी के लिए इसका ट्रीटमेंट जरूरी होता है।

डॉ. हिमांशु कहते हैं कि दिल से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है। अगर डॉक्टर को दिखाने नहीं जा सकते तो ऑनलाइन ही उनसे कंसल्ट करें और दवाइयां लेते रहें। साथ ही कोरोना होने पर शुरुआत से ही सही ट्रीटमेंट लें, किसी भी तरह की कोई लापरवाही न करें।

सही समय पर मेडिकल गाइडेंस जरूरी है

डॉ. हिमांशु कुमार ने बताया हार्ट पैल्पिटेशन किसी को भी महसूस हो सकता है। हर किसी के लिए यह नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन कभी-कभी ध्यान न देने पर यह जानलेवा हो सकता है। अगर लगता है कि आप अपनी हार्ट बीट को ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह ले

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