@संजीवनी रिपोर्टर
मांझी। लगभग 20 माह पूर्व थाना क्षेत्र के फतेहपुर सरैया गांव में स्थित राम जानकी मठ से अज्ञात चोरों के द्वारा आठ करोड़ो रूपये मूल्य की अष्टधातु की तीन मूर्ति की चोरी की गई मूर्ति तीन मूर्तियों में दो मूर्ति को मंदिर परिसर में फेंक दिया.मूर्ति फेकने की आवाज सुनने के बाद मंदिर के पुजारी ने बाहर निकल कर देखा तो दो मूर्ति पड़ी थी.मूर्ति के पास कोई व्यक्ति नहीं था.मूर्ति फेकने के बाद पुजारी ने जोर जोर से हल्लाकर इसकी सूचना पुलिस को दी.पुलिस पहुचकर मूर्ति को जब्त कर लिया.मूर्ति के पास एक जींस पैंट भी पड़ा हुआ था.

मूर्ति मिलने के बाद थानाध्यक्ष ओम प्रकाश चौहान ने स्क्वायड डॉग की टीम बुलाई.स्क्वायड डॉग की टीम ने जिंस पैंट के आधार पर मन्दिर परिसर से लगभग एक किलोमीटर दूर एक खंडहर घर तक पहुच कर रुक गया.हांलाकि एक मूर्ति पुलिस को रिकभरी बड़ी चुनौती बनी हुई है. मठ के अंदर मूर्ति चोरी की घटना दूसरी बार हुयी है. पहले भी अपराधियो ने मंदिर के पुजेरी को बंधक तीनो मूर्ति लूट लिया था. मठ के पुजारी कई दिनों पूजा छोड़ कर गायब है. पुजारी के नहीं रहने के कारण मठ बंद था. मठ के अंदर लकड़ी के बॉक्स अष्टधातु की मूर्ति रखी हुयी थी. चोरी गयी मूर्ति में श्री राम, लक्ष्मण तथा सीता की मूर्ति है. चोरी गयी तीनो मूर्ति की वजह 105 किलोग्राम बतायी जाती है.

ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान समय मे चोरी गयी मूर्ति की कीमत लगभग आठ करोड़ रुपये बतायी जाती है. मूर्ति चोरी होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी है. स्क्वायड डॉग की टीम तथा मोबाइल टेक्निकल टीम के सहारे पुलिस एक मूर्ति बरामद करने में लगी हुई है.

2012 वर्ष मूर्ति चोरी हुई थी:

वर्ष 2012 में तत्कालीन पुजेरी गोरखदास को अपराधियो ने 8 दिसंबर को बंधक बनाकर श्री राम, लक्ष्मण तथा सीता की मूर्ति लूट कर नदी के रास्ते भाग निकले थे. लगभग तीन वर्षों मूर्ति बरामद नही होने पर ग्रामीणों ने ने श्री राम, लक्ष्मण तथा सीता की पत्थर की मूर्ति की स्थापना कर पूजा पाठ शुरू की थी. 2015 में बलिया जिले के हल्दी थान में बरामद हुयी थी. मूर्ति चोरी के बाद बलिया जिले के हल्दी थाना पुलिस ने 7 मार्च को लूटी गयी मूर्ति के साथ तीन अपराधियो को गिरफ्तार किया था. खंडित होने के कारण ग्रामीणों ने उन मूर्तियों को सन्दूक में सुरक्षित रखा था. ग्रामीणों ने बताया कि चार माह से मन्दिर में कोई पुजारी नही था तथा गांव के लोग स्वयं सुबह शाम पूजा अर्चना करते थे. मूर्ति चोरी की घटना को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है. एक पुजेरी मंदिर में एक माह तक पूजा कर ग्रामीणों को मंदिर की चाभी देकर चला गया था. महीनों बाद पुनः पुजेरी एक दिन के लिए आया फिर वापस चला गया. पुजेरी के चले जाने के बाद मंदिर बन्द ही था. उसके बाद कोई मठ का पुजेरी नही आया जिसके कारण मठ बन्द था.

तत्कालीन पुजेरी के अस्वस्थ रहने पूजा नही कर रहे है:

मठ ओ पुजेरी गोरखदास के अस्वस्थ रहने के कारण लगभग पूजा नही करने जा रहे थे. लगभग 25 सालो तक पुजा करने के बाद अब अस्वस्थ रहने के कारण मन्दिर नही जा रहे है.पूजरे कि नही रहने के कारण उतर प्रदेश से ग्रामीणों ने एक पुजेरी को मंदिर में पुजा करने के लिए बुलाया था. बाद में उस पुजेरी ने भी कुछ दिनों तक पुजा करने के बाद मंदिर छोड़ कर चला गया. मूर्ति कब चोरी हुई किसी को नही पता चला
मठ में रखी मूर्ति कब चोरी हुयी किसी को पता नही चला. आज जब ग्रामीण मंदिर में गये तो बॉक्स का ताला खुल देख मूर्ति चोरी होने की बात सामने आयी।

प्रशासन को नही था पता कि मूर्ति मठ के अंदर बॉक्स में रखा गया है:

स्थानीय प्रशासन को मालूम नही थी कि मठ के अंदर बॉक्स के अंदर करोड़ो रूपये की मूर्ति रखी हुयी है. ग्रामीणों के द्वारा स्थानीय पुलिस को नही बताया गया कि करोड़ो रूपये की मूर्ति बिना सुरक्षा के मठ के अंदर रखा हुआ है. आखिर जब एक बार मूर्ति चोरी हो गयी थी तो किस परिस्थिति में मठ के अंदर बॉक्स में मूर्ति को रखा गया था? मूर्ति बरामद होने के बाद ग्रामीणों ने बिना किसी पुजेरी तथा प्रशासन को बताये मंदिर में मूर्ति क्यो रखी गयी थी.पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है.

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