मांझी उप डाकघर मे घोटाले में नया मोड़: रिटायर्ड डाक सहायक ने किया खुलासा

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– पहले ही रिकवरी हो चुकी है राशि

– मांझी डाकघर में नहीं, बल्कि दूसरे जगह से की गई थी राशि की निकासी

@संजीवनी रिपोर्टर
छपरा : जिले के मांझी डाकघर में घोटाले के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में रिटायर्ड डाक सहायक सहदेव प्रसाद यादव ने वरिष्ठ डाक अधीक्षक को पत्र भेजकर कहा है कि 5 फरवरी 2018 को वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं और 25 – 07- 2019 का यूसीआर तथा विभाग का जमा सूची की जमा की है। उन्होंने कहा है कि राशि की निकासी मांझी उप डाकघर से नहीं किया गया था, बल्कि एटीएम के द्वारा दूसरे जगह राशि की निकासी की गई थी, जिसकी यूसीआर कथा जमा सूची उन्होंने उपलब्ध कराया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है

 

कि 16 लाख 75 हजार रुपए रिकवरी कर सरकारी खजाने में जमा कराया जा चुका है, जिसमें डाक विभाग का कोई राजस्व की क्षति नहीं हुई है । डाक सहायक के द्वारा वरिष्ठ डाक अधीक्षक को भेजे गए पत्र के साथ सभी आवश्यक कागजात भी उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। बताते चलें कि डाक सहायक सहदेव प्रसाद यादव 28 फरवरी 2018 को सेवानिवृत्त हुए हैं। घोटाला की गई राशि की रिकवरी कर उससे संबंधित अभिलेख 25 जुलाई 2019 को संबंधित कर्मियों के द्वारा विभाग को जमा कराया गया था।

 

राशि की रिकवरी होने और अभिलेख उपलब्ध कराए जाने के बाद प्राथमिकी 2 वर्ष बाद दर्ज कराने के औचित्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। अगर राशि का घोटाला वर्ष 2019 में हुई तथा उस राशि की रिकवरी कर सरकारी खजाने में जमा करा दी गई तो दो वर्षों तक डाक विभाग के अधिकारी क्या कर रहे थे। दो वर्ष के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने का आखिर क्या औचित्य है। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा का बाजार गर्म है।

 

बताते चलें कि मांझी डाकघर में एक महिला के खाते से 16 लाख 75 हजार रुपए की राशि का घोटाला करने के आरोप में चार दिनों पहले प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसमें अलग-अलग तिथियों को महिला के खाते से उसके एटीएम से 16 लाख 75 हजार रुपए की निकासी किए जाने का आरोप लगाया गया है। जिस राशि के घोटाले की बात कही गई है। उस राशि को 2 वर्ष पहले ही रिकवरी कर लिया गया है और सरकारी खजाने में जमा कराया जा चुका है।

 

जबकि प्राथमिकी में आरोप है कि राशि की फर्जी निकासी के कारण सरकारी राजस्व को क्षति पहुंची है। दो वर्ष पहले ही राशि रिकवरी होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराना चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

Ranjit Kumar

Ranjit Kumar

Digital Media Reporter

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