जेपी व चंद्रशेखर के आंदोलन के सहयोगी थे जमुना बाबू

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@अंकुर सिंह

मंगलवार की सुबह चाय पीते वक्त फ़ोन की घंटी बजी। देखा तो, मेरे अभिभावक स्वरूप मित्र अंकुर जी का फ़ोन था। प्रसन्नतावस मैंने अपने हसमुख अंदाज़ में हेलो के साथ नमस्कार करते हुए उन्हें दिन अच्छा गुजरने के लिए शुभकामनाएँ दी। अचानक मेरी बात को काटते हुए वे बोल पड़े- “विशाल आपको जानकारी है कि जमुना प्रसाद जी नही रहे?”;

 

इतना सुनते ही मैं उनकी कही बातो पर विस्वास न कर सका तो पुनः पूछ उठा- “क्या हुआ? क्या कह रहे आप?” आखिर होता भी क्यों न, बात जमुना प्रसाद जी की जो थी, जी हाँ वही जमुना प्रसाद जी, जिन्होंने अपने जीवन के 94 वर्षों में भिन्न-भिन्न प्रकार से अपने किरदारों को इस तरह से निभाया की जनता रूपी दर्शक अभिभूत हो गये, कभी अज़ाद हिन्द फ़ौज के सिपाही के रूप में तो, कभी आपातकाल के दौरान चंद्रशेखर जी और जयप्रकाश जी के साथ लोकतंत्र के रक्षक के रूप में। आप भले ही एक राजनीतिक पार्टी से 4 बार विधायक रहे। 2 बार मंत्री की कुर्सी को भी शोभायमान किया।

 

आपने किन्तु आपके किरदारों में कभी रत्ती भर परिवर्तन नही दिखा। आप सदैव ही वही जमुना प्रसाद रहे, जिनमे सुभाष बाबू का व्यक्तित्व झलकता था। जीवन में अनेकों ऐसे पल आते हैं। जब हमें ना चाहते हुए भी खुद से समझौता करना पड़ता है। खासकर राजनीतिक जीवन मे ऐसा देखा जाता है, किन्तु आपकी प्रेरणामयी विचारधारा जो सदैव आपको सदमार्ग प्रेषित करती रही। उसको मेरा सलाम है।
ख़ैर ख़बर तो, मिल चुकी थी, परंतु मेरे मन में एक तरफ इतना सन्नाटा था कि टेबल पर पड़े चाय के कप पर भिनकती मक्खी की आवाज मेरे अंतर मन को कचोट रही थी। वहीं दूसरी ओर मेरा हृदय समुंदर की लहरों की भांति इतने हिचकोले खा रहा था कि मुझे माँ के बुलाने की आवाज भी न सुनाई पड़ी। दिल में एक ही प्रश्न बार बार उठ रहा था कि इस महापुरुष के अंतिम दर्शन कैसे करूँ। पर शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था।

इस महामारी की वजह से जाना संभव तो, नहीं हो सका, किन्तु मेरा हृदय जानता है कि मेरे तन से दूर मेरा अंतर्मन आपके श्री चरणों मे आज भी विराजमान है। आपका तहे दिल से धन्यवाद । उन सभी परोपकारों के लिए, जो अपने सदैव हम देशवाशियों पर किये। आप अवश्य ही प्रकृति के नियमानुसार हमारा साथ छोड़ गए, किन्तु आपके आदर्श, मूल्य, राजनीतिक दर्शन, सब सदैव इतिहास में दर्ज होकर इतिहास का मान बढ़ते रहेंगे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सद्द्मार्ग प्रेषित करती रहेंगी।

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