शिव शम्भू हैं यहीं कहीं…

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@संदीप धीमान
जोशीमठ : कुछ कहीं कुछ अनकही
ग़लत समझो या सही,
विश्वास बड़ी बात है
शिव शम्भू हैं यहीं कहीं…। उत्तराखंड को देव भूमि यूं ही नहीं कहा जाता है। यहां कण-कण में कहीं न कहीं देवी देवता आज भी निवास करते हैं। हर पग कोई न कोई इश्वर की निशानी दिख ही जाती है।
उच्च हिमालई क्षेत्र बहुत से किस्से और कहानी अपने आप में समेटे हुए है । कहीं महाभारत काल में पाण्डवों के स्वर्ग की ओर प्रस्थान करने के किस्से है जो की बैकुंठी धाम होते हुए धर्म राज युधिष्ठिर के शरीर सहीत स्वर्ग जाने की पुष्टि करते हैं तो कही केदारनाथ में महादेव से जुड़े।
आज उत्तराखंड की निति घाटी के कुछ दृश्य आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूं।
निति गांव उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ ब्लाक में समुद्र तल से लगभग साढ़े ग्यारह हजार फिट की ऊंचाई पर चीन बार्डर पर स्थित एक भारत का अंतिम गांव है।
उसी से लगभग पांच किमी पहले एक बाम्पा नाम का गांव पड़ता है, जिसकी एक ही पहाड़ी पर एक नहीं अपितु पांच आकृतियां शिव से जुड़ी दिखाई देती है।
मुख्य चित्र में बाएं से दाएं देखते हुए बड़े तो प्रथम में माता पार्वती के मुखौटे की आकृति दिखती है, वहीं थोड़ा और दाईं तरफ़ नजर मारे तो त्रिशूल की आकृति का पर्वत दिखाई देता है, उससे जुडी दाईं ओर ही गणेश जी की आकृति नजर आती है और अंतिम में भोलेनाथ, जैसे कोई ध्यान में बैठा हो और सामने से न देख कर साइड से देखो, ऐसी आकृति महादेव की दिखाईं देती है।
इसी पहाड़ी के निचे गांव के फ़ैला नाग देवता का एक मंदिर है,जिसकी पुजा आज भी गांव वाले बहुत हर्षोल्लास से करते हैं।
एक मुख्य चित्र है जिसमें पूरा पर्वत दिखाई दे रहा है और बाकी उसी पर्वत के थोड़े थोड़े अंश, जिससे की आकृति सही से देखने में आएं।
वहीं निति गांव में एक स्वयंभू शिवलिंग है जो की टिम्बरसेन महादेव के नाम से विख्यात है, जिसको उत्तराखंड का बर्फानी बाबा भी कहा जाता है, जिसके दर्शन माह दिसम्बर से फरवरी-मार्च तक ही हो पाते हैं, उसके पश्चात बर्फ पिघल जाती है।
अब आप ही सोचिए की हमारी भारत भूमि के उच्च हिमालई क्षेत्र में कितनी सुंदरता और हमारे इष्टों की निशानी है। जो की अनछुई और अनदेखी है और उधर इस दिव्य भूमि पर चीन की नजर है।

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