वैश्विक महामारी की संकट : वृद्धजनों को सामान्य दिनचर्या अपनाने की है जरूरत

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डा आकांक्षा रानी
मनोवैज्ञानिक

कोरोन वायरस जैसी वैश्विक महामारी के इस दौर में वृद्धजनों को सामान्य दिनचर्या अपनाने की जरूरत है, क्योंकि वह वर्तमान समय में अपने घर परिवार के सदस्यों की समस्याओं को लेकर अधिक चिंतित हैं। रोजगार छीन जाने, पढाई बाधित होने, व्यवसाय ठप होने की चिंता से ज्यादा चिंतित हैं और इसके बाद वृद्धजनों को फिर से सामान्य जीवन जीने में परेशानी होती है । यह स्थिति उनकी मानसिक सेहत पर बेहद बुरा असर डालती है। महामारी सिर्फ तबाही लेकर नहीं आती हैं, बल्कि इनका सामना करने वाले लोगों की मानसिक सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है, जिससे उबरना आसान नहीं होता है। यह बात हाल ही में हुई एक स्टडी में सामने आई है। ‘इंटरनैशनल जर्नल ऑफ इन्वाइरनमेंटल रिसर्च ऐंड पब्लिक हेल्थ’ में प्रकाशित इस स्टडी में बताया गया कि चाहे व्यक्ति ने छोटी आपदा का सामना किया हो या बड़ी, इसका उनकी मानसिक सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ा।

यूके में की गई इस रिसर्च के लिए नैशनल मैंटल हेल्थ सर्वे से मिले डेटा को स्टडी किया गया। इस सर्वे में लोगों से सवाल किया गया था कि क्या किसी प्राकृतिक आपदा, महामारी के कारण उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को बेरोजगार होते देखा है, घर खोया है, या महामारी से लोगों को मरते देखा है तो, उसे नुकसान पहुंचा है। इससे सामने आया कि ऐसे लोग, जिन्होंने इस स्थिति का सामना किया, उनमें से 50 प्रतिशत में खराब मानसिक स्वास्थ्य का सामना करने की ज्यादा आशंका पाई गई।
शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि प्राकृतिक आपदा महामारी से नुकसान होने के चलते लोगों की मेंटल हेल्थ पर वैसा ही असर दिखा, जैसा उन लोगों की मानसिक सेहत पर दिखता है, जो सामान्य जीवन जीने के लिए पैसों से लेकर हर चीज को लेकर संघर्ष करते हैं।

स्टडी में सामने आया है कि ऐसी स्थिति से गुजरने और उससे हुए नुकसान के कारण व्यक्ति में सुरक्षा की भावना को चोट पहुंचती है और उनका ऐंग्जाइटी व स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता है, जो आगे चलकर दिमाग की सेहत को बुरी तरह प्रभावित करता है।

दुनिया भर में बढ़ती आपदा, महामारी के बीच पर्यावरण और सेहत से जुड़ी नीतियों में बदलाव लाए जाने की जरूरत है, ताकि लोगों को इमोशनल और मेंटल ट्रॉमा से उबारने में मदद की जा सके।

क्या करें
– घरों से बाहर निकलने से करें परहेज
– बाहर न निकलने का मतलब कमरे में कैद रहना नहीं
– बुजुर्गों का खास ख्याल रखें
– रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दें
– घर के हर सदस्य बुजुर्ग सदस्यों से पूरी तरह प्यार से पेश आयें
-बुजुर्गों को एकाकीपन न महसूस हो
– साफ़-सफाई का पूरा ध्यान रखें
– उनको पर्याप्त समय दें
– ऐसे कमरे का चयन करें जो हवादार और खुला हो
– बालकनी व बरामदे में टहलने की कोई पाबंदी न हो
– मनोरंजन के लिए उनको टीवी पर उनके मनपसंद का सीरियल देखने से न रोकें
– पूजा-पाठ करते हों तो उन्हें उसको जारी रखने दें
– व्यायाम करें,इसके लिए पार्क की जगह बरामदे और बालकनी का इस्तेमाल करें
– संक्रमित होने के ख़तरे का आभास भी कम हो
– गंभीर रोग मधुमेह, ह्रदय रोग, फेफड़े एवं गुर्दे के रोग से पीड़ितों का विशेष ख्याल रखें
– खानपान पर भी ध्यान दें
– ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ सेवन करें
– गुनगुना पानी, जूस, नीबू रस गुनगुने पानी के साथ, तुलसी-अदरक वाली चाय, भोजन में दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां और दाल की भरपूर मात्रा में लें
– मांसाहारी लोग अच्छे से पके हुए चिकन-मटन व अच्छी तरह से उबाले गए अंडे का ही सेवन करें
– हाथों को बार-बार साबुन-पानी से अच्छी तरह से धोएं,
-हाथों से मुंह-आँख व नाक को अनावश्यक न छुएं
-घर के बार-बार इस्तेमाल होने वाले स्थानों की सफाई पर खास ध्यान दें
– बाहरी लोगों के संपर्क में आने से बचें

Ranjit Kumar

Ranjit Kumar

Digital Media Reporter

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