सदर अस्पताल के एनबीसीसी में नवजात शिशुओं को मिल रहा जीवनदान

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प्री मैच्चोर बेबी व सांस लेने की समस्या होने पर मिलेगा तुरंत उपचार
सदर अस्पताल में प्रसव कक्ष में स्थापित है एनबीसीसी
स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात शिशुओं की अब विशेष देखभाल
शिशु मृत्यु दर में हो रही है कमी
छपरा। जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लक्ष्य के साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इस कड़ी में सदर अस्पताल के प्रसव में निर्मित न्यू बोर्न केयर कार्नर (एनबीसीसी) नवजातों के लिए कारगर साबित हो रहा है. 37 सप्ताह से पूर्व जन्म लिए बच्चे(प्री मैच्चोर बेबी) एवं जन्म के बाद सांस लेने में समस्या होना नवजात मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल होता है. जन्म के तुरंत बाद शिशु के शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की जरूरत होती है. यदि जन्म के तुरंत बाद नवजात को गर्म रखने की समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं हो तो नवजात हाइपोथर्मिया का शिकार हो सकता है. इस यूनिट की शुरुआत होने से प्री मैच्चोर बेबी के साथ हाइपोथर्मिया की रोकथाम में विशेष लाभ मिल रहा है.

रेडिएंट वार्मर से लैस न्यू बोर्न केयर कार्नर :
न्यू बोर्न केयर कार्नर में बेबी वार्मर मशीन लगाई गयी है। यह एक ऐसा चिकित्सा उपकरण है जो नवजातों के तापमान को नियंत्रित रखता है। जन्म के तत्काल बाद नवजातों को निर्धारित तापमान उपलब्ध कराना जरूरी होता है। ऐसा न होने पर वे हाइपोथर्मिया एवं निमोनिया जैसी घातक बीमारी के चपेट में आ जाते हैं।

नवजातों को मिल रहा बेहतर देखभाल:
लेबर रूम इंचार्ज जागृति कुमारी ने बताया शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से प्रत्येक सरकारी स्वास्थ्य इकाई के प्रसव कक्ष में न्यू बोर्न केयर कार्नर बनाए गए हैं। यहां जोखिम हालातों में जन्म लेने वाले बच्चों का उपचार किया जाता है। प्रसव के बाद जो शिशु कम वजन अथवा गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, न्यू बोर्न के यर कार्नर पर जांच के दौरान इसका पता लगाकर उन्हें भर्ती कर उपचार किया जाता है। नवजात शिशु को ठंड से बचाव, नवजात शिशु में पीलिया का प्रबंधन, शिशु की श्वसन संबंधित समस्या का प्रबंधन , स्तनपान एवं फीडिंग सपोर्ट आदि सेवाएं न्यू बोर्न केयर कार्नर पर दी जाती हैं।

जीवनदायनी बन रहा एनबीसीसी:
केयर इंडिया के बीएम अमितेश कुमार ने बताया पहले के समय में प्रसव कक्षों में रेडिएंट वार्मर की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इस कारण बीमार नवजात शिशुओं को एसएनसीयू में रेफर किया जाता था। प्रसव कक्ष से एसएनसीयू तक पहुंचने में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं की जान का खतरा बढ़ जाता था। इसे दृष्टिगत रखते हुए न्यू बोर्न केयर कार्नर पर ही नवजात को शुरूआती जीवनदायनी सेवाएं मुहैया करायी जा रही है.

क्या कहते है सिविल सर्जन:
सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने बताया सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए एनबीसीसी कॉर्नर स्थापित की गयी है। जिसमें शिशुओं को बेहतर इलाज किया जा रहा है। एनबीसीसी के स्थापना से शिशु मृत्यु दर में कमी आ रही है। रेडिएंट वार्मर की उपयोगिता नवजात शिशुओं के तापमान को नियंत्रित करने की है, लेकिन बीमार नवजातों की समुचित देखभाल रेडिएंट वार्मर के बगैर नहीं हो सकती है। यह शिशुओं के पलंग के समान है, जिस पर तापमान के नियंत्रण के साथ ही सांस के अवरोध, हृदय गति आदि की जानकारियां मशीनों की स्क्रीन को देखकर दूर से ही प्राप्त की जा सकती है।

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