छपरा में ट्रेन में यात्री की हत्या मामले की RPF के आईजी- कमांडेंट व रेल DSP ने की जांच

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  • हत्यारे की हुई पहचान, गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू
  • बर्फ तोड़ने वाले नुकीले छड़ सिर में घोंप कर की गई थी यात्री की हत्या
  •  विवाद होने पर यात्रियों ने पकड़ कर आरपीएफ को मुजफ्फरपुर में ही सौंपा था
  • हाजीपुर में छोड़े जाने के बाद छपरा कचहरी में आकर हत्या की घटना को दिया अंजाम

छपरा। पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा कचहरी स्टेशन पर अप पवन एक्सप्रेस ट्रेन में दरभंगा के यात्री की हत्या करने वाले अपराधी की पहचान राजकीय रेलवे पुलिस ने कर ली है तथा उसकी गिरफ्तारी के लिए आरपीएफ के सहयोग से जीआरपी ने छापेमारी शुरू कर दी है । शनिवार को रेल डीएसपी मोहम्मद तनवीर, आरपीएफ के आईजी अतुल कुमार श्रीवास्तव, आरपीएफ के कमांडेंट ऋषि पांडेय ने हत्या की घटना की जांच की। रेल डीएसपी शुक्रवार की रात को ही छपरा पहुंच गए थे और रात भर वह सदर अस्पताल तथा छपरा जंक्शन पर इसको लेकर छानबीन व जांच पड़ताल करते रहे। रात में ही आरपीएफ के कमांडेंट वाराणसी से छपरा आ गए थे, जबकि आरपीएफ के आईजी अतुल कुमार श्रीवास्तव शनिवार की सुबह छपरा पहुंचे। रेलवे सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों ने जीआरपी के एडीजी अमित कुमार से भी बातचीत की और इस घटना के बारे में विभिन्न बिंदुओं पर विचार विमर्श किया। रेल डीएसपी मोहम्मद तनवीर ने बताया कि पवन एक्सप्रेस ट्रेन में शुक्रवार की रात को छपरा कचहरी स्टेशन पर यात्री की हत्या होने के पहले मुजफ्फरपुर जंक्शन पर सीट को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसके बाद अनिल कामती, सुनील कामती और मनकेश्वर कामती ने एक व्यक्ति को पकड़ कर आरपीएफ को सुपुर्द कर दिया था । उस ट्रेन में आरपीएफ के मार्ग रक्षी दल मुजफ्फरपुर से हाजीपुर तक के लिए तैनात थी। वह हाजीपुर में उतरते समय पकड़े गए व्यक्ति को छोड़ दी, जो पुनः पवन एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हो गया और छपरा कचहरी स्टेशन पहुंचने के बाद अनिल कामती की हत्या कर दी । उन्होंने बताया कि दरभंगा जिले के घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के पङड़ी गांव निवासी योगेश्वर कामती के पुत्र अनिल कामती और उसके भाई सुनील कामती तथा चाचा मंकेश्वर कामती दरभंगा से मुंबई के लिए यात्रा कर रहे थे। इन्हीं तीन लोगों से एक अज्ञात व्यक्ति से विवाद हुआ था, जिसके कारण अनिल कामती की हत्या उस अज्ञात व्यक्ति के द्वारा की गई। उन्होंने बताया कि अनिल कामती की हत्या कैंटीन में बर्फ तोड़ने के लिए रखे जाने वाले लोहे के नुकीले छङ उसके सिर में घोप कर की गई थी। उन्होंने बताया कि हत्या करने वाले व्यक्ति की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में अनिल कामती के भाई सुनील कामती के बयान पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है। शुक्रवार की रात में ही शव का पोस्टमार्टम कराकर सुनील कामती तथा मनकेश्वर कामती को सौंप दिया गया और शव को घर भेजवाने की जीआरपी द्वारा व्यवस्था की गई ।

रेल डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन

इस मामले में जांच के लिए सोनपुर डीएसपी के नेतृत्व में स्पेशल टीम का गठन किया गया है। जिसमें छपरा रेल थानाध्यक्ष सुमन प्रसाद सिंह, छपरा कचहरी रेल थानाध्यक्ष रवीन्द्र कुमार सिंह के अलावा अन्य पुलिस पदाधिकारियों को भी शामिल किया गया है। रेल पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि हत्या करने वाले अपराधी की पहचान कर लिया गया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है ।

आरपीएफ जीआरपी के पदाधिकारियों ने की बैठक

रेलवे सुरक्षा बल के आईजी अतुल कुमार श्रीवास्तव, कमांडेंट ऋषि पांडेय, डीएसपी मोहम्मद तनवीर समेत जीआरपी व आरपीएफ के इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टरों के साथ बैठक की और रेलवे स्टेशन तथा ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया । आईजी अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि हत्या के मामले में चिन्हित किए गए अपराधी की गिरफ्तारी शीघ्र करने का निर्देश दिया गया है। आरपीएफ और जीआरपी के पदाधिकारी एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि स्टेशन तथा ट्रेनों की सुरक्षा में जो कमियां पायी गयी है, उसे दूर करने का निर्देश दिया गया है । उन्होंने कहा सुरक्षा के प्रति आरपीएफ जीआरपी के जवानों पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश दिया गया है । उन्होंने बताया कि आरपीएफ पोस्ट तथा बैरक का निरीक्षण किया गया और दौरान जो कमियां पायी गयी है, उसे दूर करने का निर्देश दिया गया है ।

मार्ग रक्षित दल के खिलाफ होगी कार्रवाई

रेल पुलिस उपाधीक्षक मोहम्मद तनवीर ने बताया कि मुजफ्फरपुर से हाजीपुर के बीच तैनात मार्ग रक्षी दल के आरपीएफ के जवानों तथा पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी । इसके लिए संबंधित अधिकारियों को जीआरपी द्वारा पत्र भेजा जा रहा है । उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर में पकड़े गए व्यक्ति को हाजीपुर में छोड़ते समय आरपीएफ के जवानों द्वारा पीआर बांड नहीं भरवाया गया था और ना ही उसकी फोटो ली गई थी। अगर आरपीएफ के द्वारा पीआर बांड भरवाया गया होता और फोटो ले लिया गया होता तो, शायद हत्या की घटना नहीं होती । साथ ही इस घटना के होने के बाद अपराधी को पकड़ना और आसान हो जाता । इस मामले में मार्ग रक्षी दल में शामिल आरपीएफ के जवानों को दोषी माना जा रहा है और उनके विरुद्ध कार्रवाई होना उचित प्रतीत हो रहा है।

Ganpat Aryan

Ganpat Aryan

Multimedia Journalist

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