भागलपुर हिंसा मामले में अर्जित शाश्वत को मिली जमानत, लेकिन ये है शर्त..

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BHAGALPUR DESK: 17 मार्च को चंपानगर उपद्रव और जिले में बिना अनुमति नववर्ष का जुलूस निकालने के आरोप में आज कोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे समेत भाजपा के आठ नेताओं को सशर्त जमानत दे दी है। पीपी सत्यनारायण प्रसाद के मुताबिक 30 दिन तक अर्जित न तो नेतृत्व करेंगे और ना ही कोई जुलूस निकालेंगे। भाजपा महानगर अध्यक्ष अभय कुमार घोष उर्फ सोनू, प्रमोद वर्मा उर्फ पम्मी, निरंजन सिंह, सुरेंद्र पाठक, देव कुमार पांडेय, संजय भट्ट और प्रणव साह उर्फ प्रणव दास को जमानत दे दी है। वहीं, विशेष केंद्रीय कारा (कैम्प जेल) के जेलर ने कहा कि यदि शाम तक अर्जित समेत अन्य आरोपितों के जमानत के कागजात आ जाता है तो आज ही सभी बाहर निकल जाएंगे।

बता दें कि भागलपुर के नाथनगरमें हुई सांप्रदायिक हिंसा के आरोपित केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत समेत अन्य आठ भाजपा नेता आरोपी बनाये गए थे। प्रभारी ज़िला जज कुमुद रंजन सिंह ने नाथनगर दंगा कांड 176/18 में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था और उसके बाद अपना फैसला सुनाते हुए इन सबको जमानत दे दी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने केंद्रीय मंत्री के बेटे समेत सभी आरोपितों पर लगायी गयी धाराओं को केंद्रित कर बहस किया, जिसके बाद बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि पुलिस ने मनगढ़ंत कहानी बनाते हुए इन सबपर कानून की धाराओं को लगाया है। गवाह के नाम पर डीजे बजानेवाले का बयान कलमबंद किया गया है। इस सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि अर्जित शाश्वत ने पटना में 31 मार्च को सरेंडर किया था जिसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा दिया गया था। भागलपुर हिंसा मामले में कुल नौ नामजद और पांच सौ से अधिक नामजद अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज है।मालूम हो कि 31 मार्च की देर रात अर्जित शाश्वत चौबे ने बड़े ही नाटकीय अंदाज में पटना में हनुमान मंदिर के पास सरेंडर किया था जिसके बाद  उनके पिता अश्विनी चौबे समेत बिहार बीजेपी के कई नेताओं ने उपद्रव में उन्हें बेवजह फंसाने का आरोप लगाया था। 

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