संपादकीय: “संजीवनी समाचार डॉट कॉम” के दो वर्ष का सफर

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संपादक की कलम से
वेब डेस्क: 21 वीं शदी के दूसरे दशक में ‘संजीवनी समाचार डॉट कॉम’ को 5 दिसम्बर 2015 को, वैसे हालात में शुरू किया गया, जब सुदूर ग्रामीण अंचलों को कौन कहे, जिला मुख्यालयों में इंटरनेट सेवा की हालत दयनीय थी। उस समय तक बड़े मीडिया घरानों की वेबसाइट ही चलती थी। इससे भी बड़ी बात थी कि सीमित संसाधनों के साथ गलाकाट प्रतिस्पर्धा में आगे बढना । इन सबसे जुझते कब दो वर्ष गुजर गए, यह पता नहीं चल सका। आज नयी ऊंचाई और बुलंदी की ओर हम निरंतर अग्रसर हैं । हमारे सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है “सच को सच  कहने की साहस” कायम रखना । सत्ता, पूंजी व माफियाओं की तिकड़ी में उलझी मीडिया घरानों के कारनामे सबके सामने है । सच कहने का साहस दिखाने वाले पत्रकारों का जो हश्र हुआ है, इससे भी आप सभी वाकिफ हैं । पत्रकारों पर बढते हमले और पत्रकारिता का बढते दुरूपयोग से निपटने की सबसे बड़ी चुनौती सुरसा की भांति मुंह बाये खड़ी है ।  ‘संजीवनी समाचार डॉट कॉम’ की शुरुआत से लेकर अब तक न केवल इसकी निरंतरता हम लोगों ने कायम रखी बल्कि गुणवत्ता के स्तर पर भी विशेष ध्‍यान दिया। हम लोगों ने यही सोच कर ‘संजीवनी समाचार’ शुरू किया था कि मुख्यधारा के मीडिया से ओझल हो रहे जनसरोकारों से जुड़ी खबरों व मुद्दों को प्रमुखता से प्रकाशित करें और उस पर गंभीर विमर्श हो।  देश की राष्ट्रभाषा हिंदी को इंटरनेट पर प्रभावी सम्मान दिलाने के लिए सार्थक प्रयास हो। हमने इस दिशा में ईमानदारी से प्रयास किया, इसलिए महज दो साल की अवधि में ही संजीवनी समाचार वेब पत्रकारिता का चर्चित मंच व वैकल्पिक मीडिया का प्रखर प्रतिनिधि बन गया है। भाषा, विषय वस्तु और विविधता की दृष्टि से इसने वेब पत्रकारिता की दुनिया में प्रमुख स्थान बना लिया है।
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यहां हम पाठकों को बता दें कि ‘संजीवनी समाचार’ को एक महीने में लगभग 4 लाख हिट्स मिल रही हैं। इस वेबसाइट पर राजनीति, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, मीडिया, पर्यावरण, स्वास्थ्य, साहित्य, कला-संस्कृति, विश्ववार्ता, खेल से संबंधित लेख प्रकाशित हो चुके हैं।  दर्जनों समाचार-पत्रों में ‘संजीवनी समाचार’ के लेखों की चर्चा  हो चुकी है।संजीवनी समाचार डॉट कॉम के इस मुकाम पर पहुंचने में जिनका सर्वाधिक योगदान रहा है, वे हैं आप । आप हमारे  वेबसाइट को विजीट कर मेरा मनोबल ऊंचा कर रहे हैं । जब-जब संजीवनी समाचार  के साथ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े , तकनीकी सहयोग करने वाले साथियों के प्रति पूरी संजीवनी टीम आभारी है ।  सुधी पाठकों के साथ -साथ विद्वान लेखकों के प्रति भी कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं कि वे वैकल्पिक मीडिया को साकार करने में हमारे हमसफर बने। पिछले दिनों एक क्षेत्रीय अखबार के मालिक मिले और उन्‍होंने इसी संबंध में  हमसे लंबी चर्चा कर ली। ‘संजीवनी समाचार’ कैसे शुरू हुआ, कैसे आगे बढ़ा, क्‍या-क्‍या दिक्‍कतें आयीं और वेब पत्रकारिता के बारे में मेरी जो समझ बनी थी इस बारे में मैंने उन्‍हें बताया। आशा है हमेशा की तरह सुधी पाठकों  का सहयोग व स्‍नेह हमें मिलता रहेगा।
गुड्‌डू राय
संपादक
संजीवनी समाचार डॉट कॉम
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