अपने गुरु से मिलने रिविलगंज पहुंचे राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, कहा- गुरु का स्थान भगवान से उपर है

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छपरा। राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश सिंह बुधवार को अपने गुरु शैक्षणिक गुरु से मिलने रिविलगंज के गोदना मठिया गांव पहुंचे। गुरु सुरेश कुमार गिरी से मिलते ही उप सभापति हरिवंश सिंह भावविभोर हो गये। औपचारिक मुलाकात के दौरान हरिवंश सिंह ने करीब 25 मिनट तक अपने गुरु से कुशल क्षेम जाना तथा आपसी मुद्दों पर बातचीत की। हरिवंश सिंह ने बताया कि गुरु-शिष्य परम्परा भारत की पौराणिक परम्परा है। कबीर ने भी अपने दोहा में भी गुरु को भगवान से श्रेष्ठ बताया है।

हरिवंश सिंह ने बताया कि मेरे जीवन में भी गुरु का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि आज जो भी मैं हूं गुरु के प्रेरणा एवं आर्शीवाद से हूं । उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब मैं गुरु से मिलने यहां आया हूं। इसके पहले भी आर्शीवाद प्राप्त करने आता रहा हूं। आगे भी आना- जाना जारी रहेगा। गुरु के गांव की मिट्टी हमारे लिए पूज्यनीय है। उप सभापति के आगमन को लेकर भव्य तैयारी की गई थी। सैकड़ों लोगों द्वारा उप सभापति हरिवंश सिंह को फूल-माला पहनाकर स्वागत किया गया। मौके पर अवकाश प्राप्त शिक्षक अशोक कुमार गिरी, मोहन गिरी, गोपाल गिरी, डॉ प्रीतम यादव, किशोर कुमार पप्पू, पवन कुमार सिंह, अरविन्द कुमार गिरी, सुरेन्द्र सिंह, शाख प्रबंधक मो समीउज्जामां, ओम प्रकाश सिंह, संतोष कुमार सिंह, विकास कुमार सिंह, नवलेश कुमार सिंह, दिवाकर सिंह, तप्पू नाथ गिरी, सुबोध कुमार, विजय कुमार गिरी, दिनेश कुमार पंकज, सीओ राजीव रंजन पाठक एसआई माया शंकर सिंह समेत अन्य मौजूद थे।

पत्रकार के लिए हर संभव प्रयास करेंगे: उप सभापति
उप सभापति हरिवंश सिंह ने कहा कि पत्रकार निजी प्रबंधनों के हाथों में होते हैं। मैं भी पत्रकारिता से जुड़ा रहा हूं। मेरे दायरे में जो हो सकता है, पत्रकार हित के लिए हर संभव प्रयास करुंगा। पत्रकार एवं पत्रकारिता से मेरा काफी पुराना लगाव है।

 मेरेलिए हरिवंश आज भी छात्र जैसे ही हैं : सुरेश कुमार गिरी

जेपी इंटर कॉलेज सिताब दियारा के अवकाश प्राप्त गणित के शिक्षक व हरिवंश सिंह के शैक्षणिक गुरु सुरेश कुमार गिरी ने अपने छात्र हरिवंश सिंह के कामयाबी पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया के लिए हरिवंश भले उप सभापति बना है। लेकिन मेरे लिए तो वहीं हरिवंश है, जिसको हमने आठवां, नौवां एवं दशवीं क्लास में एक छात्र को पढाया था। उन्होंने बताया कि हरिवंश बचपन से ही मेधावी छात्र था। उसमें इमानदारी पूर्वक पढ़ने की ललक काफी थी। सभी कक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला हरिवंश मैट्रिक परीक्षा 1970 में टॉपर थे। स्कूली जीवन से ही हरिवंश शिक्षकों को काफी सम्मान देते थे। जो आज सफलता की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी बरकरार है।

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