शिक्षक अधिकार रैली से समान काम समान वेतन मांग के लिए शिक्षकों ने उठाई आवाज

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  • जल्द सुनाया जाए समान काम समान वेतन का फैसला
  • राष्टपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया ज्ञापन
  • डीएलएड ओडीएल परीक्षा का परिणाम का हो प्रकाशन
  • नवप्रशिक्षितों के वेतन निर्धारण के साथ हो वेतन भुगतान
  • स्नातक ग्रेड में हो नियोजित शिक्षकों की प्रोन्नति
  • नियोजित शिक्षकों का हो स्थानांतरण
  •  महिला शिक्षकों को मिले 180 दिन का मातृत्व अवकाश
  • नियोजित शिक्षकों को भी मिले ई एल और पीएफ की सुविधा

छपरा। शहर के नगरपालिका चौक पर परिवर्तनकारी शिक्षक संघ सारण जिला इकाई द्वारा “समान कार्य समान वेतन” की मांग को लेकर शिक्षक अधिकार रैली का आयोजन किया गया. शिक्षक अधिकार रैली सह धरना प्रदर्शन कार्यक्रम में जिले के 20 प्रखंड से हजारों महिला पुरुष शिक्षक शिक्षिकाओं ने भाग लेते हुए शिक्षकों के अधिकार हक और हुकूक की आवाज को बुलंद किया. रैली में उपस्थित शिक्षकों ने एक स्वर में समान काम समान वेतन की मांग की. साथ ही एक ही विद्यालय में कार्यरत 2 शिक्षकों में सरकार द्वारा बनाई गई दोहरी नीति का पुरजोर विरोध किया गया.

धरने को संबोधित करते हुए परिवर्तनकारी शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष समरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि बिहार सरकार ने बिहार में एक नई शिक्षा प्रणाली लागू की और पूरे सूबे में कई स्तरों पर शिक्षकों का विभाजन कर दिया. जिस प्रकार अंग्रेजों ने देश में फूट डालो और राज करो की नीति को बढ़ावा दिया ठीक उसी प्रकार बिहार सरकार ने बिहार के विद्यालयों में नियमित, नियोजित, 34540, टीईटी सहित कई नामों से शिक्षकों को नौकरी देकर उनके बीच आपसी विभेद कर दिया. एक ही विद्यालय में शिक्षक एक साथ विद्यालय में आने वाले बच्चों को समान शिक्षा देते हैं, लेकिन सरकार इन शिक्षकों के वेतन में विसंगतियां पैदा कर उन्हें अलग थलग कर चुकी है. कई स्तरों पर शिक्षकों की हुई नियुक्ति के बाद उनमें हुए विभेद से सरकार का मनोबल भले ही बढ़ गया हो लेकिन शिक्षक अपने हक के लिए लड़ रहे हैं.

जिस पैसों से सूबे के विकास होना चाहिए सरकार ने उसे न्यायालय में लगाया

जिला सचिव संजय राय ने कहा कि समान काम समान वेतन की मांग को लेकर माननीय हाईकोर्ट के न्यायाधीश द्वारा फैसला सुनाया गया लेकिन सरकार ने उसे नहीं माना. जिसके कारण शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाना पड़ा. माननीय न्यायालय ने हाई कोर्ट के फैसले पर सुनवाई की जिस पैसों से सूबे के विकास होना चाहिए सरकार ने फिजूल में पैसा और समय दोनों न्यायालय में लगाया. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और अंततः समान काम समान वेतन को लेकर फैसला सुरक्षित है. शिक्षक फैसले का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन वहां भी सरकार ने अपना आचरण दिखा दिया है. राष्ट्रपति का कहना है अगर कहीं किसी भी न्याय में अगर देरी होती है, फैसला नहीं सुनाया जाता है तो इसका मतलब है कि उसके पीछे कोई ना कोई रणनीति बनाई गई है. आज समान वेतन समान कार्य के फैसले के लिए शिक्षक इंतजार कर रहे हैं लेकिन अब तक कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है.

नियोजित शिक्षकों को सरकार ने हमेशा किया प्रताड़ित

जिला उपाध्यक्ष मुकेश कुमार  ने कहा कि बिहार सरकार ने हमेशा से ही शिक्षकों को प्रताड़ित किया है. सुबे में कार्यरत अप्रशिक्षित नियोजित शिक्षकों को काफी प्रयास के बाद डी एल एड (ओडीएल) प्रशिक्षण कराने की पहल की गई प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ. लेकिन जो प्रशिक्षण 2 वर्षों में पूरा किया जाना था उसे पूरा करने में सरकार को 5 साल लग गए. परीक्षा देने के बावजूद शिक्षक परिणाम प्रकाशन के इंतजार में है. सरकार की इस दोरंगी नीति को समाप्त करने के लिए परिवर्तनकारी शिक्षक संघ हमेशा सड़क पर खड़ा है. शिक्षकों के मान सम्मान हक के लिए वह हमेशा आगे खड़ा है. समान काम समान वेतन सरकार को हर हाल में देना होगा. इसके लिए राष्ट्रपति तक जाने के लिए सभी अग्रसर हैं.

शिक्षकों को मिले ई एल, महिलाओं को 180 दिन मातृत्व अवकाश

वहीं धरने को संबोधित करते हुए सूर्यदेव सिंह ने कहा कि सरकार ने प्रारंभ से ही नियोजित शिक्षकों के साथ जो भेदभाव की आधारशिला रखी है उसे हमेशा ही सरकार द्वारा बरकरार रखा गया है. सूबे के सभी सरकारी कार्यालयों में चाहे वह नियमित हो या कॉन्ट्रैक्ट पर वहाँ कार्य करने वाली महिलाओं को 180 दिन का मातृत्व अवकाश दिया जाता है लेकिन नियोजित शिक्षकों को इसमें भी विभेद देखना पड़ा. सरकार ने राज्य के कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों को 60 दिन का इएल दे दिया, पीएफ का खाता खुल गया लेकिन नियोजित शिक्षकों के हक में सरकार ने किसी तरह का कोई भी ऐलान नहीं किया. जिससे कि उसकी दोरंगी नीति और उसकी मंशा शिक्षकों के प्रति स्पष्ट दिख रही है.

स्नातक ग्रेड में प्रोन्नति और शिक्षकों का हो स्थानांतरण

वही अशोक यादव ने कहा कि स्नातक ग्रेड में शिक्षकों को जल्द से जल्द प्रोन्नति दी जाए. साथ ही साथ 10 वर्षों से अधिक की सेवा करने वाले शिक्षकों का स्थानांतरण भी करें. जिससे कि महिला शिक्षिका एवं पुरुष शिक्षकों को लाभ मिले.

धरने के उपरांत जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सूबे के मुख्यमंत्री को सात सूत्री मांगों के संदर्भ में ज्ञापन सौंपा गया.

इसके अलावे धरना को प्रवक्ता संजय राय, मांझी अध्यक्ष हवलदार मांझी, एकमा अध्यक्ष सुमन प्रसाद कुशवाहा, एकमा 2 के जयप्रकाश तिवारी, लहलादपुर के अनुज राय, बनियापुर के विनोद राय, मसरख के प्रमोद सिंह, इसुआपुर के अशोक यादव, पानापुर के जितेंद्र सिंह, मकेर के निजाम अहमद, मढ़ौरा के सूर्यदेव सिंह, तरैया के रंजीत सिंह, अमनौर के अजीत पांडे एवं नीरज शर्मा, परसा के उमेश राय, दरियापुर के अनिल राय, दिघवारा के संतोष सिंह, सोनपुर के राहुल रंजन, नगरा के विनायक यादव, रिवीलगंज के अनिल कुमार दास ने भी संबोधित किया.

कार्यक्रम में अभय सिंह, अरुण सिंह, राजीव सिंह, स्वामीनाथ राय, सुलेखा कुमारी, सरिता कुमारी, संजू देवी, सुलोचना, सुमन कुशवाहा, उपेंद्र यादव, सतीश सिंह, उपेंद्र साह, अभिषेक बाबा, विजेंद्र सिंह, विनोद विद्यार्थी, लाल बहादुर राय, मंटू मिश्रा, मनोज राम, सुनील कुमार सैनी, एहसान अंसारी, नरेंद्र राय, एजाज, फिरोज, अजय राम, जितेंद्र राम सहित हजारों लोगों ने भाग लिया.

Ganpat Aryan

Web Media Journalist

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