JDU से बगावत करने वाले शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा की सदयस्ता रद्द

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पटना.जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बागी नेता शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा मेंबरशिप खत्म कर दी गई। लंबी सुनवाई और डॉक्युमेंट्स की जांच के बाद राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सोमवार को ये फैसला सुनाया। उन्होंने माना कि दोनों ने कॉन्स्टीट्यूशन के 10वें शेड्यूल के खिलाफ काम किया। बता दें कि 2 सितंबर को राज्यसभा में जेडीयू के नेता आरसीपी सिंह ने सभापति को एप्लिकेशन देकर दोनों नेताओं की मेंबरशिप खत्म करने की मांग की थी। तर्क था कि दोनों ने अपनी मर्जी से जेडीयू छोड़ दिया है। इधर, शरद कैंप के नेता अरुण श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि सभापति ने केंद्र के दबाव में फैसला लिया है।

शरद-नीतीश में ऐसे बढ़ा था टकराव

इसी साल 26 जुलाई को नीतीश कुमार की सरकार ने कांग्रेस, आरजेडी के महागठबंधन से खुद को अलग कर लिया था। चार साल के बाद नीतीश कुमार सरकार समेत एनडीए में शामिल हो गए थे। नीतीश के इस फैसले के बाद शरद यादव और अली अनवर के साथ उनके गुट के कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद से ही नीतीश और शरद यादव जेडीयू को अपनी पार्टी बता रहे थे।पार्टी के सिंबल के लिए मामला चुनाव आयोग (ईसी) ईसी तक पहुंचा था। बाद में ईसी ने नीतीश कुमार की अगुआई वाली पार्टी को असली जेडीयू बताया था।इसके बाद 13 अगस्त 2017 को जेडीयू सांसदों ने सीनियर लीडर शरद यादव की जगह आरसीपी सिंह को राज्यसभा में जेडीयू संसदीय दल का नेता चुन लिया था। इसके लिए उन्होंने वाइस प्रेसिडेंट वेंकैया नायडू को लेटर सौंपा था।

JDU का निशाना- शरद ने जीवन भर की पूंजी गंवा दी

फैसले के बाद जेडीयू नेताओं ने शरद-अनवर पर निशाना साधा। पार्टी सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि फैसले से बागावत करने वाले ऐसे लोगों को कड़ा सबक मिलेगा। बिहार जेडीयू प्रेसिडेंट वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि साबित हुआ कि कैसे शरद ने जिंदगी की जमा पूंजी गंवा दी?

कौन हैं शरद यादव?

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में जन्मे शरद यादव ने 1971 में जबलपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज से पॉलीटिक्स की शुरुआत की थी। उस साल वे स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट चुने गए थे। डॉक्टर राम मनोहर लोहिया से इन्सपायर शरद ने कई मूवमेंट्स में पार्टिसिपेट किया। वे MISA के तहत 1969, 70, 72 और 1975 में हिरासत में लिए गए।मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करने वालों में उनका नाम लिया जाता है। साल 1974 में जेपी आंदोलन के वक्त जबलपुर लोकसभा सीट से वे पहली बार संसद पहुंचे। 1977 में भी वे यहां से सांसद चुने गए। 1986 में वे राज्यसभा से संसद पहुंचे। फिर 1989 में यूपी की बदाऊं लोकसभा सीट से चुनाव जीत एक बार फिर सांसद बने।

केंद्र में मंत्री भी रहे शरद

– 1989-90 में टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री में शरद यादव केंद्रीय मंत्री रहे। 1991 से 2014 तक शरद यादव बिहार की मधेपुरा सीट से सांसद रहे। 1995 में उन्हें जनता दल का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया और 1996 में वह पांचवी बार लोकसभा का चुनाव जीते।1997 में उन्हें जनता दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 13 अप्रैल 1999 को शरद को एविएशन मिनिस्टर बनाया गया। 1 जुलाई 2001 को वह लेबर मिनिस्ट्री में कैबिनेट मंत्री बने। 2004 में वे राज्यसभा से दूसरी बार सांसद बने और होम मिनिस्ट्री के अलावा कई कमेटियों के मेंबर रहे। 2009 में वे 7वीं बार सांसद बने और उन्हें अर्बन डेवलपमेंट कमेटी का प्रेसिडेंट बनाया गया। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्हें मधेपुरा सीट पर हार का सामना करना पड़ा था।

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