डॉक्टरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में धांधली, मानवाधिकार ने लिया संज्ञान, CS के खिलाफ जांच का आदेश 

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  • क्षेत्रीय अपर निदेशक को मिला जांच का निर्देश
  • एक सप्ताह के अंदर सौंपेगे जांच रिपोर्ट
  • सिविल सर्जन बोले– मुझे इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है 

 छपरा। सारण में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, रेफरल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की पोस्टिंग करने के मामले में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने तथा धांधली करने के आरोप में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है।  इस मामले में आयोग ने सरकार से तथ्यात्मक प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। आयोग के निर्देश के आलोक में राज्य सरकार के विशेष कार्य पदाधिकारी जगदीश कुमार ने सारण के क्षेत्रीय अपर निदेशक को जांच का आदेश दिया है और स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। सरकार के विशेष कार्य पदाधिकारी ने अपने ज्ञापांक 374 (3) 1 मार्च 2019 के माध्यम से लिखा है कि सरकार के द्वारा पहले से ही प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों की पोस्टिंग के मामले में नीति स्पष्ट की गई थी।  जिसका अनुपालन नहीं करने के आरोप में सारण जिले के मढौरा निवासी अमरेंद्र कुमार सिंह ने मानवाधिकार आयोग में इस आशय की शिकायत की है।

ट्रांसफर पोस्टिंग में सिविल सर्जन ने की मनमानी

 शिकायत में कहा गया है कि रेफरल अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों की पोस्टिंग तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों की नियुक्ति में घोर अनियमितता बरती गई है तथा सिविल सर्जन के द्वारा बड़े पैमाने पर मनमानी की गई है, जिससे सरकार के आदेशों की न केवल अवहेलना हुई है, बल्कि वरीय पदाधिकारियों के रहते हुए कनीय पदाधिकारियों को प्रभारी बनाए जाने से वरीय पदाधिकारियों के मानवाधिकारों का हनन भी हुआ है। 

आयोग ने एक सप्ताह के अंदर मांगा जांच रिपोर्ट

बिहार मानवाधिकार आयोग ने पत्रांक 3921,  8 फरवरी 2019 के द्वारा सरकार को निर्देश दिया है कि इस मामले में 27 मार्च तक स्थिति स्पष्ट करें। इस आलोक में सरकार के विशेष कार्य पदाधिकारी ने क्षेत्रीय अपर निदेशक से एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। 

आयोग ने लिया संज्ञान, सिविल सर्जन की बढ़ी बेचैनी

बिहार मानवाधिकार आयोग के द्वारा सिविल सर्जन के खिलाफ संज्ञान लेने तथा सरकार के द्वारा जांच का आदेश दिए जाने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। दोषी सिविल सर्जन की बेचैनी बढ़ गयी है  तथा पीड़ित चिकित्सा पदाधिकारियों में तरह-तरह की चर्चा का बाजार गर्म है।

क्या कहते है सिविल सर्जन

ट्रांसफर पोस्टिंग में कोई गड़बड़ी नहीं की गयी है। नियमानुसार ट्रांसफर पोस्टिंग की गयी है। मानवाधिकार से जांच का आदेश हुआ इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। 

डा. ललित मोहन प्रसाद, सिविल सर्जन सारण 

Ganpat Aryan

Web Media Journalist

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