ग्रामीण विकास के सचिव ने की समीक्षा बैठक, कहा-खुले में शौच जाने वाले बच्चों का मानसिक विकास कम

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छपरा।लोहिया स्वच्छता अभियान- बिना किसी बंधेज-विभेद के संबंध में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सभागार में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ गग्रामीण विकास विभाग के सचिव अरविन्द कुमार चौधरी ने किया।वहीं आयुक्त नर्मदेश्वर लाल ने धन्यवाद दिया। मौके पर आयुक्त ने कहा कि शौचालय नहीं रहने से गंभीर बीमारी होती है ।बच्चे इससे प्रभावित होते है। वातावरण पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। 

ग्रामीण विकास के सचिव अरविन्द कुमार चैधरी ने कहा कि शौचालय निर्माण से ही नहीं बल्कि यह व्यवहार परिवर्तन कराने की आवश्यकता है। बहुत से लोग शौचालय रहने के बावजूद भी शौचालय का प्रयोग नहीं करते है। इससे 100 में 48 बच्चे की लंबाई प्रभावित होता है। शौचालय में शौच करने वाले के मुकाबले खुले में शौच करने वाले का बौद्धिक विकास भी कम होता है। खुले में शौच करने वाले व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ते है तथा अनेक बीमारियों से ग्रसित हो जाते है। उन्होंने कहा कि लोग तो शौचालय बना रहे है, पर उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। शौचालय घर वाले के मन के अनुसार बनाया जाये और जिला स्तर पर कार्ययोजना बनाकर कार्य सुनिश्चित किया जाय। इसके लिए राशि की कमी नहीं है। एक शौचालय के निर्माण में 12,000 हजार रूपया खर्च करके बीमारी पर होने वाले खर्च 48 से 50 हजार रूपया तक बचाया जा सकता है। उन्होंने पीने का शुद्ध पेयजल एवं शौचालय उपयोग के बाद साबून से हाथ धोने आदि का प्रयोग करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हर घर में ऐसा प्रयास किया जाय कि हर घर में शौचालय का निर्माण हो और लोग आदतन उसका उपयोग करने लगे। इस कार्यशाला में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन परियोजना के निदेशक बाला मुरूगन डी, डीएम हरिहर प्रसाद, जिलाधिकारी सीवान महेन्द्र कुमार, उपविकास आयुक्त सारण, सीवान, निदेशक डीआरडीए सारण, डीपीएम जीविका तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी मौजूद थे।

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