धान सूखे की भेंट चढ़ा, खेतों में नहीं है नमी कैसे करें गेहूँ की बुआई

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छपरा । धान की फसल मारी गयी । अब गेहूँ की बोआइ पर संकट है । हथिया नक्षत्र में बारिश नहीं होने के कारण पहले धान की खेती मारी गयी । इसका असर गेहूँ की बोआइ पर भी पड़ा है । खेतों में नमी नहीं है । ऐसे में गेहूँ की फसल होने की भी आशा क्षीण होती नजर आ रही है । यह कहना है जिले के किसानों का। किसानों की सबसे बड़ी पीड़ा है कि धान का फसल चौपट हो गया और अब गेहूँ की फसल लगाने में ही बाधा उत्पन्न हो गयी है । पटवन कर खेतों में जो किसान गेहूँ की बोआइ कर चुके हैं, वह और अधिक चिंतित व परेशान हैं । शिवशंकर भगत का कहना था कि इस वर्ष रिविलगंज प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ भी नहीं आयी और हथिया नक्षत्र में बारिश भी नहीं हुयी । इसका नतीजा सामने है । लक्ष्य के अनुरूप धान का उत्पादन नहीं हुआ । अब गेहूँ की बोआइ करने में खेतों में नमी नहीं होने के कारण बोआइ नहीं हो पा रही है । इसी तरह संजय सिंह का कहना था कि रिविलगंज में राजकीय नलकूप वर्षों से खराब पड़ा है और इसे चालू करने की दिशा में कार्रवाई नहीं की जा रही है । 25 – 30 प्रतिशत ही हो सका है गेहूँ की बोआइ खेतों में नमी नहीं होने के कारण गेहूँ की बोआइ अब तक 25- 30 प्रतिशत ही हो सका है और अब गेहूँ की बोआइ होंने की संभावना काफी कम होती जा रही है । सिंचाई करके बोआइ करने की स्थिति उत्पन्न होने के कारण किसान वैकल्पिक फसल लगाने की सोच रहे हैं और इसके प्रति सरकार व कृषि विभाग लापरवाह बना हुआ है । किसानों का कहना था कि रवि फसल की बोआइ का प्रशिक्षण विभाग की ओर से शिविर लगा कर दी जा रही है लेकिन बोआइ कैसे होगी? इसके प्रति सरकार व प्रशासन लापरवाह बना हुआ है । शिवशंकर भगत ने कहा कि खेतों में नमी नहीं है । पहले तो धान की फसल मारी गयी । अब गेहूँ की बारी है । खेतों में नमी नहीं रहने के कारण फसल नहीं लगाया गया है । बोआइ के समय यह हाल है तो बाद में क्या होगा । हरेन्द्र शर्मा ने कहा कि यहां के सरकारी नलकूप वर्षों से खराब पड़े हैं । खेतों में नमी नहीं रहने के बोआइ करने के लिए निजी पंपसेट का सहारा लेना पड़ रहा है जिससे गेहूँ की बोआइ महंगा पड़ रहा है । धान की तरह गेहूँ की फसल भी मारे जाने की आशंका है ।सुमन चतूर्वेदी ने कहा कि इस वर्ष बाढ़ भी नहीं आयी और हथिया नक्षत्र में बारिश भी नहीं हुयी । इस वजह से धान का उत्पादन काफी कम हुआ । खेतों में नमी नहीं है । ऐसे में सिचाई करके गेहूँ की बोआइ करना घाटे का सौदा साबित हो सकता है । इस वजह से आर्थिक नुकसान होने की आशंका है । कामेश्वर राय ने कहा कि कृषि विभाग की ओर से शिविर लगा कर गेहूँ की खेती करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है लेकिन खेतों में नमी नहीं रहने के कारण बोआइ बाधित है जिसका वैकल्पिक उपाय क्या होगा । इसके प्रति सरकार व प्रशासन उदासीन है । सरकार व प्रशासन के रवैया काफी निराशाजनक है । सुनिल कुमार चौधरी ने कहा कि कौन सी वैकल्पिक फसल लगाया जा सकता है । यह किसानों को बताने की जरूरत है । इस समय वैसे फसल की बोआइ का प्रशिक्षण देने की जरूरत है जो कम सिंचाई व कम लागत में बेहतर उत्पादन किया जा सके । मालती देवी का कहना था कि सरकार के द्वारा किसानों को अनुदानित दर पर कृषि यंत्र दिया जा रहा है लेकिन महिला किसानों के लिए कौन सी योजना है । इसकी जानकारी विभाग की ओर से नहीं दी जा रही है । महिला किसानों की सरकार व प्रशासन अनदेखी कर रही है । उपेन्द्र सिंह ने कहा कि रिविलगंज का इलाका सरयू नदी के तट पर बसा हुआ है और तटवर्ती क्षेत्र में खेती को नदी की धारा प्रभावित करती है । इस वर्ष सरयू नदी में बाढ़ नहीं आने के कारण इस इलाके में नमी की कमी आ गयी है । इस वजह से गेहूँ की बोआइ संभव नहीं है । संजय कुमार सिंह ने बताया कि इस इलाके के बंद पड़े सभी सरकारी नलकूप को शीघ्र चालू करना चाहिए । साथ ही किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज देने की व्यवस्था करने की जरूरत है । डा आर के झा , कार्यक्रम समन्वयक सह कृषि वैज्ञानिक , कृषि विज्ञान केन्द्र, मांझी ने कहा कि गेहूँ की बोआइ करने के लिए पटवन करना होगा और बाद में भी कम से कम तीन चार -बार सिंचाई करनी पड़ेगी । ऐसे में किसानों को वैकल्पिक फसलों को लगाना चाहिए जिसमें सिंचाई कम करना पड़े और लागत खर्च भी कम हो । इसके लिए तेलहन व दलहनी फसलों को लगाना श्रेष्ठ होगा । राई, मटर, मसूर, चना की फसलों को लगाना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा । इसमें लागत कम आयेगी । सिंचाई भी कम करना पड़ेगा । सरकार की भी तेलहन व दलहनी फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और इसके बीज उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है । किसानों के लिए यह वरदान साबित हो सकता है । किसानों के द्वारा उत्पादित मटर, मसूर, चना, अरहर व तेलहन को बीज के रूप में खरीद लिया जायेगा । इसके लिए किसानों को केवल निबंधन कराना होगा । बीज उत्पादन के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र मांझी से बीज खरीदना होगा । उन्होंने कहा कि इन फसलों को लगाने व उत्पादन में लागत खर्च कम है और मुनाफा अधिक है । इन फसलों को लगाने के समय सिंचाई करनी पड़ेगी और बाद में एक बार और पटवन करना होगा ।

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