छपरा के 12 नर्सिंग होम व जांच घरों को प्रदूषण बाेर्ड ने बंद करने का दिया आदेश

Spread the love

सारण में एक भी अस्पतालों में नहीं है बायो मेडिकल कचरा का प्रबंधन

एनजीटी ने कहा– दो सप्ताह में उपलब्ध करायें अब यह आखिरी मौका है

छपरा। बेडेड व अन बेडेड सरकारी व निजी अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट रुल्स 2016 को फॉलो नहीं करने के संदर्भ में एनजीटी में दायर एक याचिका में सुनवाई की गई। जिसमें एनजीटी ने बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रिसिंपल सेक्रेटरी को हाजिर किया। एनजीटी ने प्रिसिंपल सेक्रेटरी को फटकार लगाते हुए कहा कि बार-बार कहने के बावजूद केवल अस्पतालों का एनेक्चर दिया जा रहा है। एनजीटी ने दो सप्ताह के अंदर सेक्रेटरी से अस्पतालों का डिटेल्स मांगा है। जिसमें अस्पताल का नाम, बेड, बायो मेडिकल कचरा और उसके इंतजाम है कि नहीं आदि की रिपोर्ट मांगी है। एनजीटी ने यह आखिरी मौका दिया है। यहां बता दें कि इसके पहले प्रिसिंपल सेक्रेटरी को तीन बार सुनवाई में बुलाया जा चुका है।

वेट्रन्स फोरम फॉर ट्रासंफरेंसी पब्लिक लाइफ ने दायर की है याचिका
सनद रहे कि बायो मेडिकल रुल्स 2016 के अंतगर्त वेट्रन्स फोरम फॉर ट्रासंफरेंसी पब्लिक लाइफ द्वारा एनजीटी में डिपार्टमेंट आफ हेल्थ एंड फैमिली वेल्फेयर गर्वंमेंट आफ बिहार एंड आर्गनाइजेशन पर याचिका दायर किया गया है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर व प्रिसिंपल सेक्रेटरी को पिछले सुनवाई में कई बार एनजीटी फटकार लगा चुका है। याचिकाकर्ता ने पिटशन में कहा है कि बिहार में निजी व सरकारी अस्पतालों द्वारा बायो मेडिकल वेस्ट मैनेंजमेंट का फॉलो नहीं किया जाता है। उस कचरा के लिए कोई प्रबंधन का इंतजाम नहीं है।

यहां किसी भी सरकारी व निजी अस्पतालों में नहीं है प्रबंधन
सारण जिले में सरकारी व निजी किसी भी अस्पतालों में बायो मेडिकल कचरा का प्रबंधन नहीं है। यानि इसके प्रबंधन के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। समान्य कचरों के साथ अस्पतालों से निकलने वाले कचरो को भी फेंक दिया जाता है। जो बायो मेडिकल वेस्ट रुल्स 2016 का खुलेयाम उलंघन है।

पहले 58 स्वास्थ्य संस्थाओं को पॉल्यूशन बोर्ड बंद करने का दे चुका है नोटिस,फिर 12 जांच घरों को बंद करने का आदेश
एक माह पहले बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सारण जिले के 58 क्लिनिकों व जांच घरों को क्लोजर नोटिस थमाया था। इनके खिलाफ मुकदमा दायर करने व बिजली सुविधा हटा लेने का निर्देश दिया गया था। उन 58 जांच घरों व क्लिनिकों को बंद करने का निर्देश दिया गया था। एक माह बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई कारवाई नहीं की गई। वहीं फिर से 12 और क्लिनिकों व जांच घरों को बंद करने का आदेश बोर्ड ने जारी किया है। नोटिस मिलने के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। यहां बता दें कि बायो मेडिकल व इटीपी आदि की सुविधा नहीं होने की सूरत में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह कदम उठाया है। हालांकि इस पर कोई पहल नहीं की जा रही है।

इन अस्पतालों व जांच घरों के मरीजों को सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थित करने का निर्देश
मरीजों को खास परेशानी न हो इसलिए प्रदूषण पर्षद ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि जिन अस्पतालों व जांच घरों को बंद करने को कहा गया है वहां के मरीज को किसी सरकारी अस्पताल में व्यवस्थित करें। इसके लिए कार्रवाई करने के लिए सिविल सर्जन को निर्देश जारी किया गया है।

इन 12 अस्पताल व जांच घरों को बंद करने का आदेश

  • डॉ. अनुराग सिंह,मां अंबिका हेल्थ केयर दिघवारा
  • डॉ. सुमन कुमार,उपचार सेवा सदर,परसा
  • डॉ. आर के सिंह,डॉ. प्रियंका तिवारी,लक्ष्मी सेवा सदन,एकमा
  • डॉ. भारती सिंह,देवतारा नर्सिंग होम ,काशीबाजार
  • डॉ. मोहसिन अनवर,मंगलम सेवा सदन,एकमा
  • डॉ. विद्यांचल भारद्वाज,संकल पैथो लैब,काशी बाजार
  • डॉ. गणेश लैब,भरत मिलाफ चौक
  • तारा लैब,गांधी चौक
  • भवानी जांच घर,सोनपुर
  • डॉ. आर भूषण,जीवन ज्योति उपचार केन्द्र,दरियापुर
  • बिहार हेल्थ जांच घर सोनपुर
  • शिवम पैथोलैब,काशी बाजार,छपरा

क्या कहते है सिविल सर्जन
प्रदूषण पर्षद से जो लिस्ट मिली है उसे बंद करने के लिए डीपीएम को निर्देश किया गया है। उन पर हर हाल में कार्रवाई की जायेगी। कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट भी भेजा जायेगा। नियम का पालन नहीं करने वाले क्लिनिक व जांच घरों को नहीं बख्सा जायेगा।
डॉ. ललित मोहन प्रसाद,सिविल सर्जन,सारण

Ganpat Aryan

Web Media Journalist

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
error: Content is protected !!