लालू यादव की सजा पर सुनवाई फिर टली, अब शुक्रवार को होगी सजा का ऐलान

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पटना। करीब एक हजार करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को एक और दिन के लिए सजा से मोहलत मिल गई है। आरजेडी चीफ की सजा पर गुरुवार को भी कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। अब शुक्रवार को रांची की विशेष सीबीआई अदालत इस मामले में उनको सजा सुनाएगी।इस मामले में पहले ही दोषी करार दिए जा चुके लालू यादव को 3 जनवरी को ही सजा होनी थी। बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले से जुड़ा यह दूसरा मामला है, जिसमें लालू को सजा का ऐलान होना अभी बाकी है। सीबीआई कोर्ट ने आरजेडी सुप्रीमो समेत 16 आरोपियों को 23 दिसंबर 2017 को देवघर ट्रेजरी में भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले में दोषी करार दिया था।

3 से 7 साल की सजा मुमकिन
बुधवार को वकील बिंदेश्वरी प्रसाद के निधन की वजह से उनकी सजा पर सुनवाई एक दिन के लिए टल गई थी। वकीलों ने शोकसभा की वजह से फैसला टालने की अपील की थी। लालू को इस मामले में तीन से सात साल तक की सजा मुमकिन है। अगर उन्हें तीन साल तक की सजा होती है, तो जमानत के लिए हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं। लेकिन उससे ज्यादा सजा होने पर उन्हें जेल की हवा खानी पड़ेगी।

यह मामला देवघर के सरकारी कोषागार से फर्जी अलॉटमेंट लेटर के जरिए करीब 89 लाख रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है। इससे पहले 2013 में चाईबासा ट्रेजरी केस (48 करोड़ रुपये की अवैध निकासी) में उन्हें अदालत ने पांच साल कारावास की सजा सुनाई थी। जिसके बाद लालू चुनाव लड़ने के अयोग्य हो गए थे। इस फैसले के साथ ही सजा पूरी होने के 6 साल बाद तक लालू के चुनाव लड़ने पर रोक है। 1996 में जब लालू बिहार के मुख्यमंत्री थे, उस वक्त इस घोटाले का खुलासा हुआ था। चारा घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद राज्य की सियासत ने नई करवट ली थी।

क्या है चारा घोटाला

वर्ष 1996 के जनवरी महीने में वेस्ट सिंहभूम (वर्तमान में झारखंड) जिले में छापेमारी के बाद बिहार पशुपालन विभाग के चारा घोटाले का खुलासा हुआ था। आरोप है कि इस घोटाले में सरकारी खजाने को चपत लगाते हुए 950 करोड़ रुपये का गबन किया गया।बता दें कि लालू प्रसाद सबसे पहली बार 1997 में चारा घोटाले के सिलसिले में जेल भेजे गए थे। तब उन्होंने इस्तीफा देकर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का सीएम बनाया था। हालांकि उस वक्त उनकी पार्टी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा था। लेकिन तब से लेकर अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। अंतिम बार लालू अक्टूबर 2013 में जेल गए थे, जब कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद लालू की लोकसभा सदस्यता भी छिन गई थी। माना जा रहा है कि इस बार लालू जेल गए तो उनकी पार्टी में भारी उठा-पठक हो सकती है। लालू के अलावा चारा घोटाले के आरोपियों में बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र सहित विद्यासागर निषाद, आर के राणा, ध्रुव भगत, आईएएस अफसर महेश प्रसाद और बेक जूलियस शामिल हैं। इस घोटाले से जुड़े सात आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि दो आरोपी सरकारी गवाह बन चुके हैं। इनमें से एक ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था और एक आरोपी को कोर्ट ने बरी कर दिया था।

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