नियोजित शिक्षकों के सहारे शिक्षा में सुधार की कल्पना बेईमानी: डॉ. ललित

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छपरा । बिहार में अस्थायी नियोजित शिक्षकों के सहारे शिक्षा में सुधार की कल्पना बेईमानी है। स्थायी शिक्षकों से ही शिक्षा का कायाकल्प संभव हो सकता है। हालांकि बिहार में नियोजित शिक्षकों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन सरकार की गलत शिक्षा नीति के कारण इनकी प्रतिभाओं का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है। जब एक शिक्षक का भविष्य ही असंतुलित व अस्थायी रहेगा, तो ऐसे में शिक्षण में गुणवत्ता कैसे आ सकती है? उक्त बातें पटना टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ललित कुमार ने एकमा स्थित रामाधार सिंह टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में आयोजित “बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अभिनव शिक्षक शिक्षा: परिप्रेक्ष्य और संभावना” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कही। डॉ. ललित ने शैक्षणिक बदहाली के लिए सरकार की दोषपूर्ण शिक्षा नीति को जिम्मेदार ठहराया।


उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षकों व प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर व नेता तो, आसानी से बना जा सकता है, लेकिन एक शिक्षक बनना कठिन है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के लिए विद्वान होना जरूरी नहीं है। शिक्षक को हर क्षेत्र की जानकारी और आजीवन सिखने की ललक होनी चाहिए, तभी वह बच्चों में प्रतिभा पैदा कर सकता है।इस अवसर पर आगत अतिथियों का स्वागत सचिव ई जयप्रकाश सिंह व प्राचार्य डॉ. रेणु कुमारी ने संयुक्त रुप से किया।

सेमिनार को संबोधित करते हुए जेपीविवि के अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक डॉ. उदय शंकर ओझा ने कहा कि शिक्षकों को स्कूल के बाहर भी गांव व समाज से सीधे संबंध स्थापित करना चाहिए। गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. आरडी सिंह ने स्कूली व विश्वविद्यालयी शिक्षा में स्थानीय सांस्कृतिक विधाओं को शामिल करने पर बल दिया। दूसरे दिन के सेमिनार को संबोधित करते हुए जेपीविवि छपरा के पूर्व कुलसचिव डॉ. विजय प्रताप कुमार ने शिक्षकों के समाज में योगदान की विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षक को ही राष्ट्र के भविष्य का निर्माता कहा गया है। उन्होंने शिक्षक दिवस की महत्ता को भी समझाते हुए पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। सेमिनार को डॉ. मोती, डॉ. अजीत कुमार तिवारी ने भी संबोधित किया।

सेमिनार के दूसरे दिन के प्रथम सत्र की शुरुआत लोक गायक रामेश्वर गोप, शिल्पी मिश्रा, सोनम मिश्रा की ओर से लोकगीतों की प्रस्तुति के साथ हुआ। द्वितीय तकनीकी सत्र में बीएड कॉलेज के प्रशिक्षुओं की ओर से शैक्षिक अभिव्यक्ति की प्रस्तुति की गई। इस दौरान प्रशिक्षुओं की जिज्ञासाओं व प्रश्नों के
मंच पर मौजूद वरिष्ठ शिक्षाविदों की ओर से संतुष्टिपूर्ण उत्तर भी दिए गए।
मंच का संचालन शैलेन्द्र कुमार यादव व धन्यवाद ज्ञापन अमरनाथ पासवान ने किया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री गौतम सिंह, प्रो. अजीत कुमार सिंह, शिक्षक रामेश्वर गोप, वीरेंद्र कुमार यादव, कमल कुमार सिंह, प्रवीण कुमार यादव, सपना, पूजा कुमारी, संजु कुमारी, मुन्नी कुमारी, अमरनाथ पासवान, राहुल तिवारी, जाकिर हुसैन, कौशल कुमार आदि भी मौजूद रहे।

शोध छात्रा शालिनी की प्रस्तुति की हुई सराहना

सेमिनार में जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा की रिसर्च स्कॉलर व गोपालगंज निवासी शालिनी भावसिंका की ओर से तकनीकी सत्र में दी गई प्रस्तुति को मौजूद शिक्षाविदों की ओर से सराहना की गई। शालिनी ने “इंडियन कॉन्सेप्ट ऑफ साइकॉलजी” विषय के माध्यम से अपना शोध पत्र भी जमा किया।इस मौके पर जेपीविवि के पूर्व कुल सचिव डॉ. विजय प्रताप कुमार , बीएड कॉलेज के सचिव ई जय प्रकाश सिंह, शिक्षाविद डॉ. मोती व अन्य वरिष्ठ शिक्षाविदों ने संयुक्त रुप से प्रमाण पत्र व प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

Ganpat Aryan

Ganpat Aryan

Multimedia Journalist

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