छपरा की ऋषिका सिंह ने बॉलीवुड में बनायी पहचान, अब बड़े पर्दे पर आयेगी नजर

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छपरा। संघर्ष करने की ललक हो तो मुश्किल भरा काम भी आसान सा दिखने लगता हैं जी हां शायद कुछ ऐसा कहना हैं सारण की बेटी ऋषिका का जो एक ख्वाब को संजो कर छोटी सी छपरा जैसे शहर से निकल कर चकाचौंध भरी दुनियां कहे जाने वाली मुंबई जैसे महानगरों अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हो रही हैं.

 

सारण हमेशा से संस्कृति व सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सुर्खियों में रहते आई हैं और इसी कड़ी में आज एक और कड़ी जुड़ने जा रही हैं, दुबली पतली व चंचल सी दिखने वाली ऋषिका को एक के बाद एक ब्रेक मिलते गया और आगे बढ़ती चली कभी भी पीछे मुड़ कर नही देखी.

ऋषिका बताती हैं कि सबसे पहला ब्रेक पटना में आयोजित “ब्यूटी ऑफ बिहार” में मिला था उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़ कर नही देखा उसके बाद सीआईडी, भाभी जी घर पर हैं, कुमकुम भाग्य, दिल ही तो हैं, सावधान इंडिया जैसे सरीखे नामचीन सीरियलों में काम करने का मौका मिला, उसके बाद आगामी 29 सितम्बर से 3 अक्टूबर तक नेपाल में वॉलीबॉल प्रतियोगिता होने वाला हैं जिसमें आर्मी पुलिस फोर्स ( महिला ) विंग की ब्रांड अम्बेसडर हूं जो मेरे जीवन में चार चांद लगाने का काम करेगा.

अपने माता-पिता के साथ ऋषिका

कहते हैं न हीरे की परख जौहरी ही करता हैं ठीक उसी तरह ऋषिका की मम्मी अर्चना सिंह ने बताया कि बचपन से ही टीवी सीरियल व फिल्मों में काम करने का सपना था जिसे हमलोगों ने सहयोग किया और आगे इसे मौका मिलते गया, बचपन से ही एक्टिंग व बात चीत करने का तरीका कुछ अलग ही रहता था और इसको एक ही ललक थी कि हम भी बड़े बड़े पर्दे पर दिखूं तो हमलोगों ने इसे मॉडलिंग करने की सलाह दी तभी इसका सपना पूरा हो रहा हैं.

बड़े-बड़े पर्दे पर बिहारियों का जलवा तो हैं ही इसके साथ ही छोटे परदे पर भी बिहारियों का जलवा छा रहा हैं इन्हीं में से एक हैं छपरा शहर के मिशन रोड स्थित यशवंत सिंह व अर्चना सिंह की बेटी ऋषिका सिंह जो छोटे छोटे पर्दे पर नजर आने के बाद विदेशों में भी अपना जलवा विखेरेंगी.

ऋषिका कहना हैं कि बिहार में प्रतिभा की कमी नही हैं और बिहारी प्रतिभा किसी के बलबूते नही बल्कि ईमानदारी व कठिन परिश्रम के बदौलत ही किसी को कोई मुकाम मिलता हैं बिहारी प्रतिभा दूसरे राज्यों या देशों में जाकर अपने जिले व राज्य का नाम रौशन करता हैं लेकिन वही बिहार में इस तरह की कोई संसाधन या ट्रेनिंग सेंटर खुल जाए तो अपनी मिट्टी की खुशबू यही पर खींची चली जायेगी और अपना प्रतिभा बिखेरने का मौका मिलेगा.

छोटे या बड़े पर्दे पर जाने से पहले स्किल्ड का होना जरूरी होता हैं उसके बाद हु मौका मिलता हैं इसके बगैर आप अच्छे कलाकार नहीं हो सकते हैं संवाद में उतार-चढ़ाव और अंदाज बिना प्रशिक्षण लिए नहीं सीखा जा सकता है आगे ऋषिका सिंह कहती हैं की अगर कोई अपने माँ से कहे कि बेटी के अंदाज में बात करें तो यह तभी संभव होगा जब तक आप उस कैरेक्टर को अपने अंदर नहीं उतारेंगे और यह तभी संभव होगा जब आप किसी संस्थान से जुड़ कर ट्रेनिंग लेंगे या किसी के साथ जुड़ काम करेंगे.

ऋषिका सिंह स्नैपडील, अमैजन के लिए ऐड भी कर चुकी है वे बिहार व झारखंड की प्रतिष्ठित आंख अस्पताल दिव्य दृष्टि से भी जुड़ी हुई हैं और ब्रांड अम्बेसडर भी हैं, इतना भी नही प्रिंट शूट की ऐड भी कर चुकी हैं.

ऋषिका की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा शहर के एसडीएस जैसे प्रतिष्ठित संस्था से हुई हैं और पत्रकारिता व जनसंचार विषय से पीजी की पढ़ाई नालन्दा ओपेन यूनिवर्सिटी से की हैं. पीजी करने के बाद मुंबई का रुख कर सारण जिले व बिहार का नाम रौशन कर रही हैं.

ऋषिका को पहला ब्रेक दूरदर्शन से प्रसारित होने वाला सीरियल कलेक्टर बहू में मिला था फिर दुलारी, गोतिया, बस एक चांद मेरा भी, भोरे-भोरे में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी हैं.

Ganpat Aryan

Web Media Journalist

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