सारण के तत्कालीन DM दीपक आनंद के 10 ठिकानों पर एसवीयू के टीम ने की छापेमारी

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छपरा । सारण के तत्कालीन डीएम दीपक आनंद पर आर्थिक अपराध इकाई का शिकंजा कस गया है । बालू माफियाओं से सांठगांठ के आरोप में सारण के डीएम के पद से हटाए गए दीपक आनंद इन दिनों पदस्थापन की प्रतीक्षा में थे । महज 10 वर्ष की नौकरी में करोड़ों की काली कमाई करने वाले आइएएस दीपक आनंद पर शिकंजा कस गया है। बुधवार को आर्थिक अपराध इकाई (एसवीयू) ने उनके विभिन्न ठिकानों पर छापा मारकर एक करोड़ 55 लाख से अधिक की काली कमाई का पता लगाया। देर रात छापेमारी जारी रही। वहां छापे में 76 लाख से अधिक के चल-अचल संपत्ति का पता चला है। उनके पैतृक गांव सीतामढ़ी में छापे डाले गए। कटिहार में मेडिकल की पढ़ाई कर रहीं उनकी पत्नी के कमरे को भी सील कर दिया गया है। इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के वर्ष 2007 बैच के अधिकारी दीपक आनंद को भ्रष्टाचार के मामले में ही राज्य सरकार ने सारण के जिलाधिकारी के पद से हटाया गया था। वह अपनी पदस्थापना की प्रतीक्षा में हैं। दीपक आनंद बांका और समस्तीपुर के भी जिलाधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने बतौर आइएएस अपने कैरियर की शुरुआत बेतिया के अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में वर्ष 2008 में की थी। 

एसवीयू के आइजी रत्न संजय कटियार ने कहा कि उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया गया है। विशेष निगरानी इकाई की टीम सबसे पहले वहां पहुंची। उनके कमरे की तलाशी ली गई तो, 25 लाख रुपये के किसान विकास पत्र, 27 लाख, 50 हजार रुपये के पोस्टल डिपोजिट से संबंधित कागजात और 25 लाख रुपये के स्वर्णाभूषण की खरीद की रसीद मिली है। 

एसवीयू के सूत्रों की मानें तो, सारण में भी दीपक आनंद के कई ठिकानों पर छापेमारी का काम अभी शुरू नहीं हो पाया है। मूलरूप से वह सीतामढ़ी के रहने वाले हैं। एसवीयू की एक टीम सीतामढ़ी में छानबीन कर रही। कटिहार में उनकी पत्नी एक निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं। एसवीयू ने उनकी पत्नी के हॉस्टल के कमरे को भी सील कर दिया है। 
वर्ष 2007 से लेकर अब तक उनके द्वारा अर्जित की गई संपत्ति का जब एसवीयू ने हिसाब लगाया तो, पाया कि इस अवधि में उन्होंने अपनी कमाई से 11 लाख, 76 हजार का बचत किया होगा, लेकिन उनके पास से अभी कमरे से ही एसवीयू को एक करोड़, 66 लाख, 86 हजार की चल और अचल संपत्ति के दस्तावेज मिल गए। अनुमान है कि इनमें से एक करोड़, 55 लाख, 10 हजार रुपये काली कमाई का है। उनके खिलाफ डीए केस दर्ज कर लिया गया है।  कमाई से 1300 प्रतिशत अधिक काली कमाई उन्होंने जुटाई है। आइएएस अधिकारी दीपक आनंद तब सुर्खियों में आए थे, जब सारण के डोरीगंज से बालू के उठाव में उनकी बालू माफिया के साथ सांठगांठ की खबरें सामने आई थी। तब डोरीगंज से बालू का उठाव बिना ई-चालान के ही हो रही थी । इसमें सारण के तत्कालीन एसपी भी जांच के घेरे में आ गए। फिलहाल इस मामले की निगरानी जांच चल रही है। तत्कालीन डीएम के ठिकानों पर छापेमारी को लेकर सारण जिले में चर्चा का बाजार गर्म रहा और उनसे जुड़े बालू माफियाओं और अधिकारियों की बेचैनी बढ़ गयी है ।

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