अब छपरा सदर अस्पताल में होगा आंखों का ऑपरेशन, मरीजों को मिलेगी सुविधा

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छपरा । मोतियाबिंद व अन्य आंख की बीमारियों से ग्रसित रोगियों को अब छपरा से बाहर जाने की कोई  आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आंखों के बीमारियों का इलाज और ऑपरेशन की सेवा सदर अस्पताल में शुरू होने जा जा रहा है।इसकी योजना तैयार हो गयी है। इसको लेकर अस्पताल प्रशासन  ने खर्च का ब्योरा राज्य सरकार को भेज दिया है।  
डॉक्टरों व  टेक्नशियन की होगी पोस्टिंग
सदर अस्पताल में डॉक्टरों व टेक्नशियन की जरूरत भी जल्द पूरी कर ली जाएगी। अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि इस पर लगभग 20  लाख रुपये खर्च किये जाएंगे। जिला स्वास्थ्य समिति को इससे अवगत कराया गया है। कुछ  मशीन पहले से उपलब्ध है अन्य जरूरी उपकरणों की सूची राज्य सरकार को भेजी गई है। 
आंख के ऑपरेशन के लिए अब बाहर जाने की जरूरत नहीं
अस्पताल में ऑपरेशन की व्यवस्था नहीं होने के कारण आंख के रोगी ऑपरेशन के लिए छपरा से बाहर जाते है, लेकिन अब जल्द ही ऑपरेशन की  सेवा सदर अस्पताल में ही शुरू होगी।
प्रति दिन 600 से 700 मरीज आते हैं
जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में प्रतिदिन पूरे जिले से 600 से 700 के बीच मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिनमें आंख से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या भी अधिक होती है। अस्पताल में ऑपरेशन की सेवा नहीं मिलने के कारण या तो वे छपरा के आसपास वाले जिले में इलाज के लिए जाते हैं या किसी दूसरे राज्य की सेवा लेते हैं। आंख के रोगी नि:शुल्क ऑपरेशन की सेवा देने वाले समाजसेवी संस्थानों के इंतजार में रहते हैं और कहीं कैंप लगते ही अपना इलाज कराते हैं।
अस्पताल प्रशासन ने किया  स्थल का चयन
सदर अस्पताल में आंखों की ऑपेरशन के लिए ओटी के स्थल का चयन कर लिया गया है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के दूसरी मंजिल पर ऑपेरशन थिएटर का निर्माण कराया जा रहा है। जहां पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। इसमे डॉक्टर चैंबर व ओटी का निर्माण कराया जा रहा है।
मरीजों को होगी सहूलियत
आंखों की समस्या के तहत सदर अस्पताल में रोजाना करीब 200 से 250 मरीज पहुंचते हैं। वहीं नेत्र विशेषज्ञों की कमी होने की वजह से सभी मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पाता है। हालांकि एडवांस मशीनों के चलते विशेषज्ञों को इलाज में कम समय लगेगा। साथ ही ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इलाज मिल सकेगा। अस्पताल में मोतियाबिंद, आंखों में कमजोरी, पानी गिरने आदि के मरीज आते हैं. हमारे पास मशीनें न होने की वजह से मरीजों को बाहर जाना पड़ता था लेकिन अब यहां सभी सुविधाएं मिल सकेंगी।

Ganpat Aryan

Web Media Journalist

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