अरवल में 7 लाख से अधिक लोगों को खिलायी जायेगी फाइलेरिया की दवा

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  • सीफ़ार के सहयोग से फाइलेरिया उन्मूलन पर आयोजित की गयी कार्यशाला
  • नई तीन दवाओं की नीति से होगा फाइलेरिया का सफाया
  • 7 नवंबर से 20 नवंबर तक चलेगा सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम

अरवल : जिले में सात नवंबर से घर घर जाकर आशाएं फाइलेरिया की दवाई लोगों को खिलायेंगी. यह फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. जिला में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए दवा खिलाने का पहला राउंड हो चुका है. दूसरे राउंड के तहत अब 7 नवंबर से 20 नवंबर तक फाइलेरिया की दवा पिलायी जायेगी. इसके लिए संबंधित कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. दो आशाओं की एक टीम गठित की गयी है जो घर घर जाकर दवाई खिलायेंंगी. इस काम की मॉनिटरिंग प्रभारी चिकित्सा प्रभारी करेंगे और शाम को रिपोर्ट देंगे. किसी भी परिस्थिति में फाइलेरिया की दवाई पिलायी जानी है और जिला से फाइलेरिया का पूर्णत: समाप्त करेंगे. यह बातें जिलाधिकारी रविशंकर चौधरी ने जिला समाहरणालय सभागार में सीफ़ार के सहयोग से आयोजित मीडिया कार्यशाला के दौरान कही. उन्होंने कहा इस दवा को कोई भी नुकसान नहीं होता है और सभी लोग इस दवाई का सेवन करें. दवाई खाने से फाइलेरिया से होने वाली बीमारी जैसे हाथी पांव से बचा जा सकता है. 7 व 8 नवंबर को स्कूलों में यह दवा खिलायी जायेगी.

राज्य समन्वयक नेगलेकटेड ट्रॉपिकल डिजीज विश्व स्वास्थ्य संगठन के राजेश कुमार ने बताया मास ड्रग एडमिन्स्ट्रिेशन के लिए अरवल का चयन किया जाना उपलब्धि है. पहले भी अरवल में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए दवा खिलायी गयी है. अब इसमें एक और दवाई दिया जायेगा. उन्होंने बताया कि फाइलेरिया की रोकथाम के लिए पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित दो दवाओं की नीति अपनाई जाती थी. इसमें डाईइथाईल कार्बामाजीन व एलबेंडाजोल शामिल था. अब इन दवाओं के साथ एक और दवा को शामिल किया गया है. इसकी शुरूआत बिहार के अरवल से ही हुई है. पिछले साल भी जिले में इन दो दवाओं के साथ आइवरमेकटिन को एमडीए में शामिल किया गया था. उन्होंने बताया इस दवा के सेवन से फाइलेरिया से मुक्त हुआ जा सकता है. फाइलेरिया के लक्षण नहीं दिखने पर भी इस दवा का सेवन करना जरूरी है. यह दवा सभी लोगों को खानी है.

अन्य विभागों की भी सहभागिता:

कार्यशाला में पीसीआई के नेशनल प्रोग्राम मैनेजर रणपाल सिंह ने कहा इस सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के साथ जीविका, शिक्षा विभाग और पंचायती राज विभाग का सहयोग प्राप्त होगा. ये दवा हर एक आदमी को खानी है जो इस जिले से संबंध रखता है. उसे फाइलेरिया का खतरा है. इस दवाई के सेवन का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है. यदि इस दवा के खाने के बाद उल्टी, हल्का बुखार या चक्कर आता है तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है. बल्कि इसे समझने की जरूरत है कि उसमें फाइलेरिया के जीवाणु मौजूद हैं और यह लक्षणों में से एक है. यानी वह व्यक्ति फाइलेरिया जीवाणु से प्रभावित है.

730 आशाएं देंगी फाइलेरिया की दवा:
वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार सिन्हा ने कहा जिला में 3500 लोग फाइलेरिया से पीड़ित है. अभियान के दौरान सात लाख से अधिक लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके लिए 365 टीम तैयार की गयी है. प्रत्येक टीम में दो आशा रहेंगी. 730 आशाओं को फाइलेरिया की दवा खिलाने के काम की जिम्मेदारी दी गयी है. प्रत्येक छठे दिन पर आशा दोबार घर घर जायेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि परिवार में फाइलेरिया की दवा खिलायी गयी है या नहीं. वहीं दवा खिलाने का काम आशा के सामने ही होगा. आशा यह भी सुनिश्चित करेंगी कि दवा उनके सामने दिया गया है. अरवल के सभी पांच प्रखंडों में दवा खिलाने का काम होगा. पोलिया अभियान की तरह ही फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान दवाई सेवन के बाद बायें हाथ की तर्जनी उंगली के नाखुन पर मार्किंग की जायेगी.

इन लोगों को नहीं खानी है दवा:

फाइलेरिया की दवा दो साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जानी है. साथ ही गर्भवती महिलाओं व गंभीर रूप से बीमार लोगों को यह दवा नहीं खिलाया जायेगा. आवरमेटरिन दवा दो साल से कम उम्र के बच्चें को छोड़ कर सभी को उसकी लंबाई के आधार पर दिया जायेगा. अलबेंडाजोल सभी लोगों दिया जाना है. डीईसी दो साल से पांच साल की उम्र के बच्चों को एक गोली, छह साल से पंद्रह साल के बच्चों को दो गोली और सोलह साल उम्र के बच्चों व इससे अधिक उम्र वाले लोगों को तीन गोली दिया जाना है.कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ अरविंद कुमार, भीबीडी जिला सलाहकार मनोज कुमार, सीफार से अपर राज्य प्रबंधक रणजीत कुमार, पीसीआई के राज्य प्रबंधक सौरभ शुक्ला व अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे.

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