विश्व मधुमेह दिवस : सात दिवसीय नि:शुल्क मधुमेह जांच शिविर आयोजित

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छपरा : विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर रविवार को श्यामचक स्थित संजीवनी नर्सिंग होम एवं मेटरनिटी सेंटर में सात दिवसीय नि:शुल्क मधुमेह जांच शिविर एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शिविर में मधुमेह के मरीजों की जांच की गई। जिसमें 200 मरीजों के बीपी, ब्लड सुगर की निःशुल्क जांच की गई। जांच का शुभारंभ डॉ. अनिल कुमार ने करते हुए कहा कि इस तरह के निशुल्क जांच शिविर लगाए जाने चाहिए, जिससे गरीब मरीजों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सकेगा। मधुमेह से बचाव के लिए सजग रहने की जरूरत है। खान-पान के साथ जीवन शैली में बदलाव लाया जाना आवश्यक माना गया है। व्यस्तता के कारण ससमय नाश्ता-भोजन की उपेक्षा, धूम्रपान, उचित खान-पान के साथ नियमित रूप से व्यायाम की उपेक्षा से बचते हुए समय-समय पर मधुमेह संबंधी जांच कराया जाना जरूरी होगा। तनाव मुक्त माहौल में कार्यों का संपादन इस रोग से बचाव में कारगर हो सकता है। मधुमेह रोगियों के शरीर का घटना वजन अन्य रोगों को बढ़ावा देने लगता है। इसके रोगियों का खान-पान सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं बल्कि, शरीर के ब्लड शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखने में सहायक होता है। इसके रोगियों को खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर निःशुल्क मधुमेह जांच शिविर सप्ताह की शुरुआत की गई है। यह 17 नवंबर तक चलेगी। उन्होंने कहा कि बार-बार पेशाब लगना, अधिक प्यास लगना, बेवजह वजन घटना, ज्यादा भूख लगना, हमेश संक्रमण होना मधुमेह रोग का लक्षण माना जा सकता है। इस तरह की शिकायत वाले लोगों को शिविर पखवाड़ा में पहुंच कर निःशुल्क जांच का लाभ उठाना चाहिए। मौके पर डा संजू प्रसाद, चार्टर्ड एकाउंटेंट तरूण कुमार, अधिवक्ता अभय कुमार यादव, स्वास्थ्यकर्मी मुन्नी देवी, श्वेता सिंह, रिता देवी, गुड्डी कुमारी, अमृता कुमारी, चिन्टू कुमार, उमेश कुमार राय, शैलेश कुमार, लक्ष्मण यादव, जुही कुमारी, माया देवी, शिव कुमारी, संजय कुमार, पप्पू शेखर, अजीत कुमार आदि ने भाग लिया ।

मधुमेह से होने वाले नुकसान व बचाव के उपायों पर चर्चा

संजीवनी नर्सिंग होम एवं मेटरनिटी सेंटर में तत्वाधान में आयोजित संगोष्ठी में मधुमेह से होने वाले नुकसान व बचाव के उपायों पर चर्चा की गई। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मधुमेह रोग एक ऐसी बीमारी है जो एक बार जिसे हो गई तो वह कभी जड़ से खत्म नहीं होती। इसे सिर्फ दवाओं, योग व दिनचर्या में परिवर्तन कर नियंत्रित किया जा सकता है। शुगर होने के बाद इंसुलिन की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है। इस पर नियंत्रण न करने पर तमाम तरह की परेशानी होती है। इससे बचने के लिए भोर में चार बजे से आठ बजे के बीच 20 से 30 मिनट टहलने की आदत हम सभी को डालनी होगी। टहलने से शुगर के साथ ही बीपी भी नियंत्रित रहता है। इसके अलावा अपनी दिनचर्या व खान पान में भी बदलाव लाना जरूरी है। आज हम मेहनत का काम काफी कर करते है। दिन भर कुर्सी पर बैठे रहते है। जिसके चलते ही यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। कुर्सी पर बैठ कर काम करने वालों को हर आधे घंटे पर एक-दो मिनट के लिए ही सही उठ कर टहल जरूर लेना चाहिए। शुगर होने पर आदमी चिड़चिड़ा हो जाता है और अवसाद से ग्रस्त हो जाता है। डा संजू प्रसाद ने कहा कि हमारी जीवन शैली ही इस रोग को बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है। इसलिए हमें अपनी जीवन शैली में परिवर्तन लाना होगा। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि मिठाई देख कर ही डर लगने लगा है। सबसे बड़ी विडंबना तो, यह है कि यदि कोई व्यक्ति डायबीटीज नहीं है तो, लोग अचरज में पड़ जाते हैं। बच्चों में शुगर का कारण फिजिकल एक्टीविटीज का स्कूलों में न कराया जाना है। पढ़ाई के साथ ही खेलकूद अत्यंत जरूरी है।

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