अब काॅस्ट डिवाइस से ट्रेनों के परिचालन में होगा व्यापक बदलाव

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छपरा: पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा – गोरखपुर तथा छपरा – वाराणसी, छपरा – थावे रेल खंड पर ट्रेनों के परिचालन में जल्द ही एक बड़ा बदलाव होने वाला है। इन सभी रेल खंडों पर काॅस्ट डिवाइस लगाई जायेगी। डिवाइस इन रेल खंडों का  आकलन कर यह बताएगी कि क्या प्रबंध कर स्पीड बढ़ा सकते हैं और इन रेल खंडों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की कितनी गुंजाइश है।

डिवाइस के जरिए यह भी पता चल सकेगा कि रेल खंड पर ट्रिपलिंग या स्टेशन बनाने की जरूरत है या नहीं । रेलवे अधिकारियों के अनुसार रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन ने कैपिसिटी ऑप्टमाइजेशन एंड सिमुलेशन टूल (कॉस्ट) नाम की एक डिवाइस विकसित की है, जिससे यह अध्ययन होगा कि किस रेल खंड पर  कितनी ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है । यह भी पता चलेगा कि  कितनी ट्रेनों की संख्या कम करने की जरूरत है। इसका मुख्य उद्देश्य  समयपालन और गति को व्यवस्थित करना है । अधिकारियों का कहना है कि कई बार ऐसी स्थिति आती है, जब औसत गति न मिलने के कारण ट्रेनें विलंबित हो जाती हैं। औसत गति ज्यादा होने पर अतिरिक्त ट्रेन चलाने या उसके फेरे बढ़ाने की गुंजाइश होती है। डिवाइस को एक रेल खंडों पर ट्रेनों की क्षमता व उनकी रफ्तार का आकलन करने के लिए लगाया जायेगा ।

आंकलन के आधार पर होगा बदलाव

आकलन रिपोर्ट के आधार पर रेल खंडों पर बदलाव किया जायेगा, जिससे ट्रेनों का परिचालन निश्चित अनुपात में ससमय हो सकेगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे दो सबसे बड़े फायदे यह होंगे। पहला यह कि ट्रेनों को बेहतर औसत गति तो मिलेगी ही, साथ ही ट्रेनों की संख्या भी बढ़ायी जा सकेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार डिवाइस विकसित करने के साथ ही इसका ट्रायल भी चल रहा है। इसके पूरा होते ही इसे ऑपरेशन में शामिल कर दिया जायेगा। आरडीएसओ के कार्यपालक निदेशक एन के सिन्हा ने बताया कि इस डिवाइस के जरिए एक रेल खंड के ट्रैक पर ट्रेनों की क्षमता और स्पीड के बारे में बारीकी से अध्ययन किया जा सकेगा।

क्या है स्थिति:  वर्तमान समय में ट्रेनों की औसत चाल और उनकी संख्या का निश्चित अनुपात पता नहीं चल पाता है। इसका मुख्य कारण ट्रैक व्यस्त रहता है और ट्रेनों का परिचालन प्रायः विलंब से होती है। कहीं – कहीं औसत गति  अच्छी होती है,लेकिन वहां ट्रेनें काफी कम भी है।

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