ऐनुल बरौलवी “ग़ज़ल-शिल्पी सम्मान” से नवाज़े गए

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छपरा : पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा जंक्शन के सेवानिवृत्त गार्ड व मशहूर- ग़ज़लकार ऐनुल बरौलवी ग़ज़ल-शिल्पी सम्मान” से रविवार को नवाज़े गए। वह साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था “बज़्म-ए-हबीब” के संस्थापक सचिव, “आगमन” साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं “देवशील” साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं समाजसेवी संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं । उन्हें मां प्रभावती देवी स्मृति संस्था जहानाबाद की ओर को एक सम्मान समारोह “एहतराम-ए-ग़ज़ल” में यह सम्मान दिया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता जहानाबाद के सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी ने किया। 

इस अवसर पर कवि सम्मेलन व मुशायरे का भी आयोजन किया गया । जिसमें ऐनुल बरौलवी ने गंगा-जमुनी तहज़ीब और अमन के लिए अपने कलाम पढ़े और ख़ूब वाह वाही बटोरी—–
“सुनो फिर मुल्क को टुकड़ों में मत बांटों।
हमें अब ज़ात ओ धर्मों में मत बांटों।
बहुत कर ली सियासत आजतक तुमने ,
हरे-भगवे के अब रंगों में मत बांटों।”
उन्हें अदबी ख़िदमत और इनके द्वारा कहे गये बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिया गया। इसके पहले कई राज्यों से करीब दो दर्ज़न से अधिक अदबी सम्मान मिल चुके हैं। इनके कलाम देश-विदेश के पत्र-पत्रिकाओं में लगातार छपते रहते हैं और स्थानीय एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरे में लगातार अपने कलाम सुनाते आ रहे हैं। दूरदर्शन पर भी आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।  शायर व ग़ज़लकार ऐनुल बरौलवी को “ग़ज़ल-शिल्पी सम्मान” मिलने से अदबी हल्के में खुशी की लहर है।

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